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वसन्त-पंचमी निबंध | Vasant Panchami Nibandh in Hindi

वसन्त-पंचमी निबंध | Vasant Panchami Nibandh in Hindi

वसन्त-पंचमी का आगमन

माघ शुक्ल पंचमी को ‘वसन्त-पंचमी ‘ के नाम से जाना जाता है। कोशकार रामचन्द्र वर्मा के अनुसार ‘वसन्त-पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का सूचक है।ऋतु गणना में चैत्र और वैसाख, दो मास वसन्त के हैं। फिर उसका पदार्पण चालीस दिन पूर्व कैसे ? कहते हैं कि ऋतुराज वसंत के अभिषेक और अभिनन्दन के लिए शेष पाँच ऋतुओं ने अपनी आयु के आठ-आठ दिन वसन्त को समर्पित कर दिए। इसलिए वसन्त-पंचमी चालीस दिन पूर्व प्रकट हुईं । यह तिथि चैत्र कृष्णा प्रतिषंदा से चालीस दिन पूर्व माघ शुक्ला पंचमी को आती है।

भूमध्य रेखा का सूर्य के ठीक-ठीक सामने आ-जाने के आस-पास का कालखंड है वसन्त। अत: वसन्त भारत का ही नहीं, विश्व-वातावरण के परिवर्तन का द्योत्तक है । सम्भव है कभी बृहत्तर भारत में माघं के शुक्ल पक्ष में वसंतागमन होता हो और माघ शुक्ल पंचमी को वसन्त-आगमन के उपलक्ष्य में ‘अभिनन्दन॑ पर्व ‘ रूप में प्रस्थापित किया हो। वस्तुतः वसन्त-पंचमी वसन्तागमन की पूर्व सूचिका ही है, इसी कारण इसे ‘ श्री पंचमी ‘ भी कहते हैं।

वसन्त-पंचमी

वसन्त-पंचमी:सरस्वती का जन्मदिन

वसन्त-पंचमी विद्या की अधिष्ठात्री देवीभगवती सरस्वती का जन्म दिवस भी है। इसलिए इस दिन सरस्वतीपूजन का विधान है। ज्ञान की गहनता और उच्चता का सम्यक्‌ परिचय इसी से प्राप्त होता है। पुस्तकधारिणी वीणावादिनी माँ सरस्वती की यह देन है कि वे जीवन के रहस्यों को समझने कौ सूक्ष्म दृष्टि प्रदान कर ज्ञान लोक से सम्पूर्ण विश्व को आलोकित करती हैं । अत: सरस्वती पूजा ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ के आदर्श पर चलने की प्रेरणा देती है–

महो अर्ण: सरस्वती प्रचेतयति केतुना। धियो विश्वा विराजति।’

(ऋग्वेद ।/3//2)

प्राचीन काल में वेद-अध्ययन का सत्र श्रावणी पूर्णिमा से आरम्भ होकर इसी तिथि को समाप्त होता था।

गत बीसवीं शताब्दी में वसन्त-पंचमी को न तो विद्या का सत्र समाप्त होता था, न विद्याभ्यास के लिए मंगल-दिन मानकर विद्या-ज्ञान का आरम्भ होता था। हाँ, माँ शारदा की कृपा एवं आशीर्वाद के लिए ‘सरस्वती पूजन’ अवश्य होता रहा है।

वसन्त-पंचमी :रति-कामदेव की पूजा का दिन

पौराणिक कोश के अनुसार वसन्त-पंचमी रति और कामदेव की पूजा का दिन है। मादक महकती वासन्ती बयार में, मोहक रस पगे फूलों की बहार में, भौरों की गुंजार और ‘कोयल की कूक में मानव हृदय जब उल्लसित होता है, तो उसे कंकणों का रणन, नुपुरों की रुनझुन, किंकणियों का मादक क्वणन सुनाई देता है। मदन-विकार का प्रादुर्भाव होता है तो कामिती और कानन में अपने आप यौवन फूट पड़ता है ।जरठ (वृद्धा) स्त्री भी अद्भुत श्रृंगार- सज्जा से आनन्द पुलकित जान पड़ती है । दाम्पत्य और परिवारिक जीवन की सुख- समृद्धि के लिए रति और कामदेव की कृपा चाहिए। अत: यह रति-कामदेव पूजन का दिन माना जाता है।

वीर हकीकत राय का बलिदान दिवस

वसन्त-पंचमी किशोर हकीकत राय का बलिदान-दिवस भी है । सियालकोट (अब पाकिस्तान) का किशोर हकीकत मुस्लिम पाठशाला में पढ़ता था। एक दिन साथियों से झगड़ा होने पर उसने ‘कसम दुर्गा भवानी ‘ की शपथ लेकर झगड़ा समाप्त करना चाहा। मुस्लिम छात्रों ने, जो झगड़ा करने पर उतारू थे, दुर्गा भवानी को गाली दी। हकौकत स्वाभिमानी था, बलवान्‌ भी था। प्रत्युत्तर में फातिमा को गाली दी। ‘फातिमा’ को गाली देने के अपराध में उसे मृत्यु-दण्ड या मुस्लिम-धर्म स्वीकार करने का विकल्प रखा गया। किशोर हकीकत ने मुस्लिम धर्म स्वीकार नहीं किया। उसने हँसते हुए मृत्यु का वरण किया।

उस दिन भी वसंत-पंचमी थी। लाहौर में रावी का तट था। सहस्नों हिन्दू जमा थे। सबके सामने मुस्लिम शासक की आज्ञा से उस किशोर का सिर तलवार से काट दिया गया। रावी नदी के तट पर खोजेशाह के कोट- क्षेत्र में धर्मवीर हकीकत की समाधि बनाई गई । स्वतन्त्रता-पूर्व सहस्नों लाहौरवासी वसंत-पंचमी के दिन वीर हकीकत की समाधि पर इकट्ठे होते थे। मेला लगता था। अपने श्रद्धा-सुमन चढ़ाते थे।

वसन्त-पंचमी मनाने के ढंग

वसन्त-पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनने की प्रथा थी। वह प्रथा आज नगरों में लुप्त हो गई है। गाँवों में अवश्य अब भी उसका कुछ प्रभाव दिखाई देता है। हाँ, बसंती हलुआ, पीले चावल तथा केसरिया खीर खाकर आज भी वसन्त-पंचमी पर उल्लाल, उमंग प्रकट होता है। परिवार में प्रसन्‍नता का वातावरण बनता है।

बसन्त हृदय के उल्लास, उमंग, उत्साह और मधुर जीवन का द्योतक है। इसलिए वसन्त-पंचमी के दिन नृत्य-संगीत, खेलकूद प्रतियोगिताएँ तथा पतंगबाजी का आयोजन होता है। वसन्त मेले लगते हैं। वसन्त-पंचमी प्रतिवर्ष आती है । जीवन में वसंत (आनन्द) ही यशस्वी जीवन जीने का रहस्य है, यह रहस्योद्घाटन कर जाती है।

FAQ

बसंत पंचमी कब है 2022 में ?

22 जनवरी (सोमवार) – सरस्वती पूजा या बसंत पंचमी त्यौहार मनाया जायेगा I

क्या सरस्वती पूजा के दिन पढ़ना चाहिए?

विद्या और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती आज के दिन ही प्रकट हुई थी I इसलिए आज के दिन बच्चों से ॐ लिखवाया जाता है I आज के दिन शिक्षा संस्कार का भी आरम्भ करने का विधान हैं I

सृष्टि पूजा कब है?

बसंत पंचमी के दिन ही सृष्टि पूजा की जाती है I

सरस्वती माता का व्रत कौन से दिन रखा जाता है?

बसंत पंचमी के दिन

सरस्वती पूजा कितने तारीख को है कौन सा महीना में?

22 जनवरी (सोमवार) 2022 – सरस्वती पूजा या बसंत पंचमी त्यौहार मनाया जायेगा I

सरस्वती का जन्मदिन कब है?

विद्या और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती बसंत पंचमी के दिन ही प्रकट हुई थी I

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