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संविधान में राम, कृष्ण और नटराज की फोटो क्यों?

संविधान में राम, कृष्ण और नटराज की फोटो क्यों?

संविधान में राम, कृष्ण और नटराज की फोटो क्यों?

कुरुक्षेत्र में भगवान् श्री कृष्ण का अर्जुन को गीता उपदेश देना , गंगा नदी का स्वर्ग से उतरकर धरती पर आना , शिव के नटराज स्वरुप का नृत्य करना और राम सीता और लक्ष्मण का फोटो ये सब हिन्दू धर्म के प्रतीक के रूप से सदियों से जाने जाते हैं I 1947 में आजादी मिलने के बाद जब संविधान का निर्माण हुआ तो इन तस्वीरों को संविधान की मूल प्रति पर भी स्थान दिया गया I जहाँ एक तरफ़ संविधान में धर्म निरपेक्षता की बात की गयी है वहीँ इन धार्मिक तस्वीरों का होना किस तरफ़ इशारा करता है आइये समझते हैं I

संविधान में राम, कृष्ण और नटराज की फोटो क्यों?

संविधान में राम और कृष्ण क्यों ?

भारत में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही भारत को गणतंत्र घोषित कर दिया गया I इसी संविधान की मूल प्रति पर राम , सीता और लक्ष्मण है , श्री कृष्ण के साथ अर्जुन हैं , नृत्य करते हुए नटराज हैं, यज्ञ की तस्वीर है , भगवान् बुद्ध और हिन्दू धर्म का अभिन्न अंग कमल भी है I संविधान का हिस्सा न होते हुए भी ये चित्र अब भारतीय संविधान का एक अटूट अंग हैं I

नृत्य करते हुए नटराज
श्री कृष्ण के साथ अर्जुन

निवर्तमान क़ानून मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद जी ने बताया कि संविधान की ये फ़ोटो यदि आज लगायी गयी होती तो इस पर सांप्रदायिक विरोध शुरू हो गया होता I

बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने जब संविधान तैयार किया तो उन्होंने बताया था की भारत का संविधान धर्म के आधार पर कोई भेद-भाव नही करने हिसाब से बनाया गया है I जैसा कि हम जानते हैं कि भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष हैI तो फिर संविधान में राम, कृष्ण और नटराज की फोटो क्यों?

धर्म नहीं, संस्कृति के प्रतीक

ये सभी फ़ोटो संविधान में किसी धर्म के आधार पर नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति के प्रतीक के रूप में लगायी गयीं हैं I जब संविधान अपने अंतिम रूप में था उस समय यह प्रश्न उठा कि कहीं संविधान भारतीय सभ्यता-संस्कृति से अलग थलग न लगे I अगर ऐसा होता तो लोगों का संविधान पर उतना विश्वास नही होता जैसा कि इन चित्रों के लगने के बाद था I इसी सोच के तहत संविधान में इन चित्रों को अंकित किया गया ताकि समस्त जन मानस इससे जुड़ सके I

उसी समय भारत के निवर्तमान प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मुलाक़ात प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस से शांति निकेतन में हुयी I जब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नंदलाल बोस को संविधान की मूल पुस्तक के लिये चित्र बनाने के लिये आमंत्रण दिया तो उन्होंने इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया I नंदलाल बोस और उनके शिष्यों ने 4 साल के परिश्रम के बाद सभी 22 अध्यायों के लिये 22 चित्र बनाये I जो आज भी भारतीय संविधान की शोभा बढ़ा रहें है I

उसी दौरान प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू शांति निकेतन गए तो वहां उनकी मुलाकात प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस से हुई. गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के सान्निध्य में बड़े हुए नंदलाल को संविधान की मूल पुस्तक को अपनी चित्रकारी से सजाने का निमंत्रण दिया गया. नंदलाल बोस ने नेहरू के न्योते को स्वीकार किया. उन्होंने इस काम में अपने छात्रों का भी सहयोग लिया. चार साल में नंदलाल बोस और उनके छात्रों ने कुल 22 चित्र बनाए और इतनी ही किनारियां बनाईं. संविधान के सभी 22 अध्यायों को इन चित्रों और किनारियों से सजाया गया.

हड़प्पा की खुदाई से सम्बंधित चित्र

नंदलाल बोस और उनके शिष्यों ने भारतीय इतिहास को ध्यान में रखते हुए चित्र बनाये न कि किसी धर्म विशेष को ध्यान में रखते हुए I उन्होंने पहला चित्र अशोक स्तंभ की लाट का बनाया जो भारत का राष्ट्रीय चिह्न है , जिसे संविधान के पहले पन्ने पर शतं दिया गया I भारतीय संविधान की प्रस्तावना को हड़प्पा की खुदाई से मिले घोड़े, शेर, हाथी और सांड़ की चित्रों की सुनहरी किनारी से सजाया गया है I

संविधान में अकबर और टीपू सुलतान

संविधान में राम ही नहीं मुगल बादशाह अकबर के दरबार का चित्र भी है

मुगल बादशाह अकबर के दरबार का भी चित्र संविधान की मूल पुस्तक में अंकित है I मैसूर के शेर के नाम से जाने वाले टीपू सुल्तान का भी चित्र मूल प्रति में अंकित किया गया है I

रानी लक्ष्मी बाई और गुरु गोविंद सिंह भी

रानी लक्ष्मी बाई और गुरु गोविंद सिंह भी

1857 के स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई के चित्र भी संविधान की मूल प्रति में अंकित किया गया है I सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविन्द सिंह के चित्र को भी संविधान की मूल पुस्तक में स्थान दिया गया है I

संविधान की मूल पुस्तक में मुगल बादशाह अकबर भी अपने दरबार में बड़े शान से बैठे हुए दिख रहे हैं. सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह भी वहां मौजूद हैं. मैसूर के सुल्तान टीपू और 1857 की वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई के चित्र भी संविधान की मूल प्रति पर उकेरे गए हैं. संविधान की मूल प्रति संसद के पुस्तकालय में सुरक्षित है.

गंगा मैया और भागीरथ भी

भागीरथी, जिनके प्रयास से धरती पर गंगा का अवतरण हुआ , और गंगा माता के भी चित्र को संविधान की मूल पुस्तक में स्थान दिया गया हैI

गंगा मैया और भागीरथ भी

नेता जी और हिमालय

नेता जी और हिमालय

महात्मा गाँधी

महात्मा गाँधी

गौतम बुद्ध

गौतम बुद्ध

यज्ञ करते ऋषि

यज्ञ करते ऋषि

मुझे पूरा विश्वास है कि अब आपको विश्वास हो गया होगा कि – संविधान में राम, कृष्ण और नटराज की फोटो क्यों? इस प्रश्न का जवाब मिल गया होगा I ये सभी फ़ोटो संविधान में किसी धर्म के आधार पर नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति के प्रतीक के रूप में लगायी गयीं हैं I

भारतीय संविधान से जुड़े रोचक तथ्य

FAQ

भारतीय संविधान में क्या लिखा है?

भारतीय संविधान में वर्तमान समय में भी केवल 395 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियाँ हैं और ये 25 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियाँ थीं।

संविधान में कुल कितने शब्द हैं?

भारत का संविधान विश्व के किसी भी सम्प्रभु देश का सबसे लम्बा लिखित संविधान है, जिसमें, 146,385 शब्द हैंI

संविधान कितने पन्नों का है?

संविधान की पांडुलिपि में 251 पन्ने हैं, जिसका वजन 3. 75 किग्रा है।

भारतीय संविधान कितने देशों से मिलकर बना है?

60

संविधान का वजन कितना था?

संविधान की पांडुलिपि में 251 पन्ने हैं, जिसका वजन 3. 75 किग्रा है।

“When you have a dream, you’ve got to grab it and never let go.”

“Nothing is impossible. The word itself says ‘I’m possible!'”

“The bad news is time flies. The good news is you’re the pilot.”

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