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मेरी प्रिय पुस्तक पर 600 शब्दों में निबंध, भाषण । 600 Words Essay speech on My Favourite Book in Hindi

मेरी प्रिय पुस्तक पर 600 शब्दों में निबंध, भाषण – 600 Words Essay speech on My Favourite Book in Hindi

मेरी प्रिय पुस्तक से जुड़े छोटे निबंध जैसे मेरी प्रिय पुस्तक पर  600 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  600 Words Essay speech on My Favourite Book in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

600 Words Essay Speech on My Favourite Book in Hindi for Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

पुस्तकों के महासमुद्र में सभी पुस्तकों का अध्ययन कर पाना संभव नहीं है। फिर भी अभी तक मैंने जितनी पुस्तकों का अध्ययन किया है या गुरुजनों, बड़े-बुजुर्गों एवं पूर्वजों द्वारा जिनके बारे में चर्चा सुनी है, उन सबमें गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ‘रामचरित मानस‘ मेरा सर्वाधिक प्रिय ग्रंथ है।

यदि हिंदी के विशाल सागर में केवल ‘रामचरित मानस’ रह जाए, तो भी हिंदी दरिद्र नहीं हो सकती। इस महाकाव्य में नाम तो श्रीराम का है, लेकिन गाथा जन-जन की है। इसीलिए तुलसीदास की ‘रामचरित मानस’ भारत के महलों एवं झोंपड़ियों में समान रूप से विराजती है, साथ ही साथ पूजित भी है।

सत्य और त्याग- ये भारतीय संस्कृति के दो बीजमंत्र हैं। इस महाकाव्य के नायक श्रीराम सत्य और त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। अत: गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘रामचरित मानस’ में भारत की संस्कृति विराजती है। इस महाकाव्य के सभी पात्र भारतीय संस्कृति के अनुरूप हैं। यह ग्रंथ राम जैसा पुत्र, भरत और लक्ष्मण जैसे भाई, सीता जैसी पत्नी, हनुमान जैसा सेवक तथा सुग्रीव एवं विभीषण जैसे मित्र का आदर्श हमारे सामने प्रस्तुत करता है।

परंपरा के अनुसार परिवार के बड़े पुत्र के रूप में श्रीराम को राजगद्दी पर आसीन होना चाहिए था, लेकिन अपने पिता की आज्ञानुसार वे राजमहल का सुख त्याग कर जंगल में एक तपस्वी की तरह मारे-मारे फिरे

कठिन भूमि कोमल पदगामी।

कवन हेतु विचरहु वन स्वामी ॥

रामचरित मानस

यह त्याग और अनुशासन का अनूठा उदाहरण है। श्रीराम एक आदर्श भाई भी हैं। लक्ष्मण को मूर्च्छित देखकर वे विलाप करते हुए कहते हैं

अस बिचारि जिय जागहु त्राता। मिलई न जगत सहोदर भ्राता ॥

रामचरित मानस

इस प्रकरण से समाज में भाई की महत्ता स्थापित होती है। मित्र सुग्रीव के कष्ट से द्रवित होकर भगवान श्रीराम कहते हैं

जेन मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि बिलोकत पातक भारी॥

रामचरित मानस

इस प्रकार बीराम एक आदर्श मित्र भी हैं। सीता जी इस महाकाव्य की नायिका हैं। इनके द्वारा भारतीय नारी को संस्कृति का पूर्णरूपेण पालन हुआ है। श्रीराम के साथ अपने वनगमन का औचित्य ठहराते वे कहती हैं

जिय बिनु देह नदी बिनु बारी। वैसी नाथ पुरुष बिनु नारी ॥

रामचरित मानस

इसी प्रकार इस महाकाव्य के अन्य पात्र भी पूर्णतः मर्यादित हैं। इसकी एक विशेषता यह भी है कि इसमें पशु-पक्षी को देवतुल्य चित्रित किया गया है. यथा- हनुमान जी, जामवंत जी, गरुड़ जी, काक भुशुंडी जी आदि।

600 Words Essay speech on My Favourite Book

‘रामचरित मानस’ साहित्यिक दृष्टि से भी बेजोड़ ग्रंथ है। इसकी चौपाई, छंद सोरठे एवं दोहे अनुपम अर्थ तथा ऊंचे भावों के साथ गेय हैं। भक्तगण तो इन्हें गा-गाकर भाव-विभोर हो नाचने लगते हैं। यह ग्रंथ प्रेरणा और ज्ञान का भंडार है। सभी वेदों के सारतत्व का निचोड़ अत्यंत सहज ढंग से इस ग्रंथ में समाहित किया गया है। ‘रामचरित मानस’ की निम्नांकित चौपाई में ब्रह्म, माया एवं जीव को सरलतम व्याख्या प्रस्तुत की गई है

उभय बीच सिय सोहई कैसे।

ब्रह्म जीव बीच माया जैसे

रामचरित मानस

धर्म-अधर्म की व्यावहारिक व्याख्या भी इस महाकाव्य में की गई है

परहित सरिस धर्म नहिं भाई।

परपीड़ा सम नहीं अधमाई ॥

रामचरित मानस

‘रामचरित मानस’ हमें कर्म करने की प्रेरणा भी देती है

कर्म प्रधान विश्व रचि राखा।

जो जस करहिं सो तस फल चाखा ॥

रामचरित मानस

वस्तुत: ‘रामचरित मानस’ एक ऐसी कामधेनु है, जिसकी दुग्ध धारा न हो सूखी है और न कभी सूखेगी, क्योंकि इसमें भारतीय संस्कृति की आत्मा बसती है। संक्षेप में, महाकवि तुलसीदास कृत ‘रामचरित मानस’ हिंदी साहित्य के ललाट पर चमचमाती एक कालजयी बिंदी है

सच मानो, तुलसी न होते तो हिंदी कहीं पड़ी होती, उसके माथे पर रामायण की बिंदी नहीं जड़ी होती।

मेरी प्रिय पुस्तक पर अनमोल वचन – Best Quotes on My Favourite Book

  • बिना किताबों के कमरा बिना आत्मा के शरीर के समान हैI – Marcus Tullius Cicero  मार्कस  टुल्लिअस   सिसरो
  • कोई  व्यक्ति, चाहे पुरुष हो या महिला, जिसे एक अच्छा उपन्यास पढने में आनंद ना आये, वो निश्चित रूप से बहुत मूर्ख होगाI-Jane Austen जेन  ऑस्टेन
  • अच्छे मित्र, अच्छी किताबें, और साफ़ अंतःकरण : यही आदर्श जीवन हैI- Mark Twain  मार्क  ट्वेन
  • मैंने हमेशा कल्पना की है कि स्वर्ग एक तरह का पुस्तकालय हैI-Jorge Luis Borges  जॉर्ज  लुईस  बोर्गेज
  • मुझे  टेलीविज़न  बहुत शिक्षित करने वाला लगता हीI हर बार जब कोई इसे चलाता है, मैं दूसरे रूम में चला जाता हूँ और एक किताब पढता हूँI-Groucho Marx ग्रुशो मार्क्स
  • कभी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा ना करें जिसने अपने साथ किताब ना लायी होI-Lemony Snicket लेमनी स्निकेट
  • यदि कोई एक ही किताब बार-बार पढने का आनंद ना उठा पाए तो उसे पढने का कोई फायदा नहीं हैI-Oscar Wilde ऑस्कर  वाइल्ड

(600 Words Essay speech on My Favourite Book in Hindi)

  • जब पढने की मजबूरी ना हो तब आप क्या पढ़ते हैं यही निर्धारित करेगा कि आप जब आपके बस में ना हो तब आप क्या बनेंगेI-Oscar Wilde ऑस्कर वाइल्ड
  • आप कभी भी इतना बड़ा चाय का प्याला या इतनी बड़ी किताब नहीं पा सकते जो मुझे सूट कर सकेI- सी.एस. लुईस
  • यदि आप सिर्फ वही किताबें पढ़ते हैं जो बाकी सभी पढ़ रहे हैं तो आप वही सोच पायेंगे जो बाकी सभी सोच रहे हैंI-Haruki Murakami हरुकी  मुराकामी
  • स्वस्थ्य संबधी किताबें पढने में सावधान रहियेI आप एक मुद्रण त्रुटी से मर सकते हैंI-Mark Twain मार्क  ट्वेन
  • एक किताब जितना वफादार कोई दोस्त नहीं हैI-Ernest Hemingway अर्नेस्ट हेमिंग्वे
  • “क्लासिक” – एक ऐसी किताब जिसकी लोग प्रशंशा करते हैं और पढ़ते नहींI-Mark Twain मार्क  ट्वेन
  • मैं सबके सामने घोषणा करता हूँ : पढने जैसा कोई आनंद नहीं हैI-Jane Austen जेन ऑस्टेन
  • किताबें मित्रों में सबसे शांत और स्थिर हैं ; वे सलाहकारों में सबसे सुलभ और बुद्धिमान हैं, और शिक्षकों में सबसे धैर्यवान हैंI-Charles William Eliot चार्ल्स विलियम एलियोट

(600 Words Essay speech on My Favourite Book in Hindi)

  • बच्चों की कहानी जिसका सिर्फ बच्चे आनंद उठा सकें वो बिलकुल भी अच्छी बच्चों की कहानी नहीं हैI-सी.एस. लुइस
  • ऐसे मत पढो, जैसे बच्चे पढ़ते हैं, मजे के लिए, या जैसे महत्त्वाकांक्षी पढ़ते हैं, निर्देश के लिएI नहीं, जेने के लिए पढोI-Gustave Flaubert गुस्ताव फ्लौबेर्ट
  • यदि कोई ऐसी बुक है जिसे तुम पढना चाहते हो, पर वो अभी लिखी ही नहीं गयी है, तो तुम्हे उसे ज़रूर लिखना चाहिएI-Toni Morrison टोनी मोरीसन
  • जब मेरे पास कम पैसे होते हैं तो मैं किताबें खरीदता हूँ, और अगर कुछ बचता है तो मैं खान और कपड़े लेता हूँI- Desiderius Erasmus Roterodamus डेजीडेरिअस  इरेस्मस  रोटेरोदमस
  • मैं किताबों के बगैर जिंदा नहीं रह सकताI- Thomas Jefferson  थॉमस  जेफ़र्सन

(600 Words Essay speech on My Favourite Book in Hindi)

  • बिना शब्दों की किताब बिना चुम्बन के प्रेम के सामान है; वो खाली हैI-Andrew Wolfe एंड्रू वोल्फे
  • किताबें पढने की दो वजहें हैं ; पहली, कि आप उसका लुत्फ़ उठा सकें ; दूसरा कि आप उसके बारें में डींगें हांक सकेंI-Bertrand Russell बेरट्रेंड  रसेल

(600 Words Essay speech on My Favourite Book in Hindi)

  • कुछ किताबों को चखना चाहिए, कुछ को निगलना, लेकिन बस कुछ को ही अच्छे से चबाना और पचाना चाहिएI=Cornelia Funke  कोर्नेलिया  फंकी
  • अपना तेज बनाये रखने के लिए जिस तरह तलवार को पत्थर की ज़रुरत होती है उसी प्रकार दिमाग को किताबों कीI- जॉर्ज आर.आर. मार्टिन
  • किताबों से हमेशा सावधान रहना चाहिए,” टेसा ने कहा है, ” और जो उनके अन्दर है, क्योंकि शब्दों में हमें बदलने की शक्ति होती हैI-Cassandra Clare  कैसेंड्रा क्लेयर

(600 Words Essay speech on My Favourite Book in Hindi)

  • किताबें जलाने से भी बदतर अपराध हैंI उनमे से एक है उन्हें ना पढनाI-Joseph Brodsky जोसफ ब्रोड्स्की
  • किताबें परिपूर्ण मनोरंजन हैं: कोई विज्ञापन नहीं, कोई बैटरी नहीं, हर डॉलर के बदले घंटों का आनंदI-Stephen King स्टीफन किंग
  • यह नियम बना लीजिये; कभी किसी बच्चे को वो किताब नहीं दीजिये जो आप खुद नहीं पढेंगेI-George Bernard Shaw  जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

(600 Words Essay speech on My Favourite Book in Hindi)

  • बोलने से पहले सोचोI सोचने से पहले पढ़ोI- फ्रैन  लेबोवित्ज़
  • अच्छी पुस्तकें अपना सार राज़ एक बार में नहीं बतातींI-Stephen King स्टीफेन किंग
  • यदि आपके पास एक बागीचा और पुस्तकालय है तो आपके पास वो सब कुछ है जो आपको चाहिएI-Marcus Tullius Cicero मार्कस टुलीयस सिसरो
  • पुस्तकें हवाईजाहज, ट्रेन, और सड़क हैंI  वो गंतव्य हैं और यात्रा भीI वे घर हैंI-Anna Quindlen एना क्विनडलेन
  • पोषण, आश्रय और साहचर्य के बाद, कहानियां वो चीजें हैं जिनकी हमें दुनिया में सबसे ज्यादा ज़रुरत होती हैI-Philip Pullman  फिलिप पुलमैन
  • किताबों के बगैर घर खिड़कियों के बिना कमरे के सामान हैI-Horace Mann होरेस मैन

(600 Words Essay speech on My Favourite Book in Hindi)

  • किताबें दर्पण की तरह हैं: यदि एक मूर्ख अन्दर देखता है तो आप किसी प्रतिभावान के बाहर देखने की उम्मीद नहीं कर सकतेI- जे.के. राउलिंग
  • लेकिन मेरे लिए, अगर किताब अच्छे से लिखी गयी है, वो हमेशा मुझे बहुत छोटी लगती हैI-Jane Austen जेन ऑस्टेन
  • मेरे सबसे अच्छा मित्र वो व्यक्ति है जो मुझे ऐसी किताब दे जो मैंने पढ़ी ना होI-Abraham Lincoln अब्राहम  लिंकन
  • कुछ ऐसी किताबें हैं जिसका अगला और पिछला हिस्सा ही उसका सबसे अच्छा भाग होता हैI-चार्ल्स डिकेन्स Charles Dickens

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नमस्कार , मेरा नाम अंजू वर्मा है | मै उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव से हूँ | मै हिंदी भाषा में पोस्ट ग्रेजुएट हूँ| हिंदी साहित्य में मेरा जुड़ाव बचपन से ही रहा है इसीलिए मैंने परास्नातक के लिये हिंदी को ही एक विषय के रूप में चुना |अंग्रेजी के इस दौर में जहाँ हिंदी एक स्लोगन बनता जा रहा है जबकि जनसँख्या का एक बड़ा हिस्सा हिंदी भाषी है |लेकिन हम अंग्रेजी बोंलने को एक हाई सोसाइटी से जुड़ाव का माध्यम मानने लगे हैं | मुझे कुकिंग, घूमने एवम लिखने का शौक है मै ज्यादातर हिंदी भाषा , मोटिवेशनल कहानी, और फेमस लोगों के बारे में लिखती हूँ |

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