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वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर 600 शब्दों में निबंध, भाषण । 600 Words Essay speech on Modern Education System in Hindi

वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर 600 शब्दों में निबंध, भाषण – 600 Words Essay speech on Modern Education System in Hindi

वर्तमान शिक्षा प्रणाली से जुड़े छोटे निबंध जैसे वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर  600 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  600 Words Essay speech on Modern Education System in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

600 Words Essay Speech on Modern Education System in Hindi for Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

वर्तमान शिक्षा प्रणाली का मतलब है-स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद स्वदेशी सरकार के शासनकाल में भारत में शिक्षा के तौर-तरीके। अंग्रेजों के शासनकाल में हमारे देश की शिक्षा प्रणाली शत प्रतिशत अंग्रेजों की रूचि पर आधारित थी। अंग्रेज भारत में शिक्षा का प्रचार-प्रसार इस प्रकार करने लगे कि भारत के लोग कागज के कीड़े हो सकें, कार्यालय क्लर्क से अधिक कुछ न हो सकें तथा प्रतिभा का उदय न हो सके। साथ ही उनकी सोच यह भी थी कि प्रतिभा का विकास भी न हो सके। अंग्रेज तो भारतीयों को शिक्षित बनाकर विशेष रूप से अंग्रेजी सिखाकर मात्र अपने शासन को सुचारू रूप से चलाने की जुगत में थे।

भारत के आजाद होने के बाद यहां उसी पुरानी घिसी-पिटी पद्धति से पठन-पाठन होता रहा। आज की शिक्षा प्रणाली सिर्फ उपाधि हासिल करने के लिए है, इसका व्यावहारिक शिक्षा यानी व्यावहारिक जीवन से कोई संबंध नहीं है। आज डिग्री धारक भी सड़क घर धूल छानने के लिए विवश हैं। जब अंग्रेज भारत आए, तो भारतीयों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए उन्हें भाषा-माध्यम की आवश्यकता थी। इसी के मद्देनजर उनकी शिक्षा प्रणाली थी।

उस काल में भारतीय कला और संस्कृति से संबंधित विषयों के महत्व को सिखाया जाने लगा तथा विद्यार्थियों में पाश्चात्य सभ्यता के प्रति विशेष आदर भाव पैदा करने का कुचक्र रचा जाने लगा। लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी भाषा को भारत की राष्ट्रभाषा घोषित करके उसे स्कूलों में अनिवार्य किया। फलतः उन्हें सस्ते दामों पर ऑफिसों के लिए क्लर्क मिलने लगे। क्लर्कों का उत्पादन ही उनका परम उद्देश्य था, जो आज हमारे लिए अभिशाप सिद्ध हो रहा है। लॉर्ड मैकाले ने स्पष्ट कहा था, “मेरा उद्देश्य इस शिक्षा से केवल यही है कि भारत में अधिक से अधिक क्लर्क पैदा हों और भारत बहुत दिनों तक हमारा गुलाम बना रहे।”

परंतु भारतीय मनीषियों ने शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य को मनुष्य और फिर देवता बनाना कहा है। वही हमारे जीवन में आत्मगौरव, स्वावलंबन, परोपकार एवं कर्तव्य पालन की क्षमता आदि गुणों को जगाती है। वर्तमान शिक्षा प्रणाली आज हमारे विद्यार्थियों को अध:पतन की ओर ले जा रही है। आज सर्वत्र विद्यार्थियों में अवगुणों, अनुशासनहीनता, ज्ञान शून्यता और फैशन परस्ती का बोलबाला है।

आजकल के छात्रों में न तो माता-पिता एवं गुरु के प्रति निज कर्तव्य-पालन का ध्यान है और न ही जीवन का उच्चादर्श है। आज की शिक्षा प्रणाली से चरित्रहीनों एवं बेरोजगारों की एक फौज खड़ी हो रही है। यही चरित्रहीन और बेकार लोग आए दिन अपराध कर्म में संलिप्त होते रहते हैं। आधुनिक शिक्षा प्रणाली डॉक्टर, इंजीनियर, राजनेता आदि तो बनाती है, लेकिन आदमी नहीं बना पाती। इस शिक्षा प्रणाली से बना डॉक्टर रोगी की नब्ज टटोलने से पहले उसकी जेब टटोलने लगता है, इंजीनियर देश में निर्माण कार्य करने से पहले अपने परिवार के निर्माण में लग जाता है और राजनेता देश के निर्माण के नाम पर देश का सौदा करने लगता है।

वर्तमान शिक्षा प्रणाली में आमूल परिवर्तन बहुत आवश्यक है। यह शिक्षा सृजनात्मक होनी चाहिए, ताकि डिग्री प्राप्त करने के पश्चात छात्रों को नौकरी न ढूंढनी पड़े, बल्कि वे स्वयं नौकरी का सृजन करें। नई शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जिससे व्यक्ति में समाज सेवा, राष्ट्र प्रेम एवं त्याग आदि की भावना कूट-कूटकर भर जाए। इसी के द्वारा वह मानवता की सीख लेकर ‘सा विद्या या विमुक्तयें’ की उक्ति को चरितार्थ कर सकता है।

अभी भारत में शिक्षा का जो स्वरूप है, उसमें राष्ट्रीय स्तर पर 10+2+3 शिक्षा व्यवस्था है। इसका मतलब है कि दसवीं कक्षा तक राज्य स्तरीय हाई स्कूल शिक्षा परिषद का गठन है, दो वर्षों की इंटरमीडिएट शिक्षा के लिए राज्य स्तरीय इंटरमीडिएट शिक्षा परिषद का प्रावधान है और तीन वर्षों के लिए विश्वविद्यालयीय स्तर पर स्नातक शिक्षा की व्यवस्था है। शिक्षा में आवश्यक परिवर्तन का सुझाव देने के लिए कोठारी आयोग का गठन किया गया था। सन 1966 में इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट दे दी थी, उसी को फिर से सामने लाया जा रहा है। उसमें कहा गया है कि शिक्षा को व्यावसायिक यानी व्यवसाय परक बजाए और उत्पादन से जोड़ा जाए।

उसी रिपोर्ट के आधार पर 10+2+3 शिक्षा योजना प्रारंभ की गई। नि:संदेह इसमें कुछ मौलिक सुझाव निहित हैं। आज की शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए यह आवश्यक है कि शिक्षा को नौकरी प्राप्त करने का साधन मानने की बात सबसे पहले खत्म की जाए। नौकरी के लिए उस विशेष विभाग की दक्षता की अपेक्षित योग्यता समझा जाए, जिसमें उसे कार्य करना है, तभी विद्यार्थी उच्चतर विद्यालयों के दो वर्षीय पाठ्यक्रम में रोजगार परक प्रशिक्षण ईमानदारी से ग्रहण करेंगे और 10+2+3 शिक्षा योजना कुछ लाभदायक सिद्ध हो सकेगी।

यदि अधिक लोग 10+2+3 की शिक्षा लेकर विभिन्न रोजगारों में लग जाएं और राष्ट्रीय उत्पादन करने लगें, तो तीन वर्षीय विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में अनावश्यक भीड़ नहीं होगी। यह भीड़ पत्राचार पाठ्यक्रम या प्राइवेट परीक्षा को सुविधा द्वारा नियंत्रित की जा सकेगी और उच्च शिक्षा में वास्तविक रूचि रखने वाले छात्र प्रवेश पा सकेंगे। इस प्रकार विश्वविद्यालयों में प्रवेश की समस्या को लेकर जो हंगामा खुली भर्ती के नाम पर होता है, वह भी खत्म हो जाएगा। इतना होने पर भी सार्थक और सोद्देश्य शिक्षा की संभावनाएं स्पष्ट हो सकेंगी। शिक्षा के क्षेत्र में व्यवस्था एवं शांति स्थापित हो सकेगी और शिक्षा द्वारा छात्रों में मानवीय मूल्यों को स्थापित किया जा सकेगा।

600 Words Essay Speech on Modern Education System

FAQ:-

भारतीय शिक्षा प्रणाली क्या है?

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात ही शिक्षा प्रणाली का विकास होना प्रारंभ हो गया था सर्वप्रथम 1948 में विश्वविद्यालय आयोग का गठन किया गया जिसको हम (राधाकृष्णन कमीशन ) के नाम से भी जानते है इसके पश्चात वर्तमान तक कई आयोगों का गठन हो चुका है जिनमें माध्यमिक शिक्षा आयोग ,1952-53 , राष्ट्रीय शिक्षा आयोग(कोठारी आयोग),1964-66 , राष्ट्रीय शिक्षा नीति,1986 , संशोधित राष्ट्रीय शिक्षा नीति,1986 और राष्ट्रीय ज्ञान आयोग,2005-09 शामिल हैं।

भारत में शिक्षा के उद्देश्य क्या है?

शिक्षा मनुष्य के भीतर अच्छे विचारों का निर्माण करती है, मनुष्य के जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। बेहतर समाज के निर्माण में सुशिक्षित नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इंसानों में सोचने की शक्ति होती है इसलिए वो सभी प्राणियों में श्रेष्ठ है लेकिन अशिक्षित मनुष्य की सोच पशु के समान होती है।

आधुनिक शिक्षा प्रणाली क्या है?

अभी भारत में शिक्षा का जो स्वरूप है, उसमें राष्ट्रीय स्तर पर 10+2+3 शिक्षा व्यवस्था है। इसका मतलब है कि दसवीं कक्षा तक राज्य स्तरीय हाई स्कूल शिक्षा परिषद का गठन है, दो वर्षों की इंटरमीडिएट शिक्षा के लिए राज्य स्तरीय इंटरमीडिएट शिक्षा परिषद का प्रावधान है और तीन वर्षों के लिए विश्वविद्यालयीय स्तर पर स्नातक शिक्षा की व्यवस्था है। शिक्षा में आवश्यक परिवर्तन का सुझाव देने के लिए कोठारी आयोग का गठन किया गया था। सन 1966 में इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट दे दी थी, उसी को फिर से सामने लाया जा रहा है। उसमें कहा गया है कि शिक्षा को व्यावसायिक यानी व्यवसाय परक बजाए और उत्पादन से जोड़ा जाए।

शिक्षा की परिभाषा क्या है?

व्यापक अर्थ में शिक्षा किसी समाज में सदैव चलने वाली सोद्देश्य सामाजिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा मनुष्य की जन्मजात शक्तियों का विकास, उसके ज्ञान एवं कौशल में वृद्धि एवं व्यवहार में परिवर्तन किया जाता है और इस प्रकार उसे सभ्य, सुसंस्कृत एवं योग्य नागरिक बनाया जाता है।

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मै आशा करती हूँ कि  वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर लिखा यह निबंध ( वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर  600 शब्दों में  निबंध,भाषण । 600 Words Essay speech on Modern Education System in Hindi) आपको पसंद आया होगा I साथ ही साथ आप यह निबंध/लेख अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ जरूर साझा (Share) करेंगें I

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नमस्कार , मेरा नाम अंजू वर्मा है | मै उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव से हूँ | मै हिंदी भाषा में पोस्ट ग्रेजुएट हूँ| हिंदी साहित्य में मेरा जुड़ाव बचपन से ही रहा है इसीलिए मैंने परास्नातक के लिये हिंदी को ही एक विषय के रूप में चुना |अंग्रेजी के इस दौर में जहाँ हिंदी एक स्लोगन बनता जा रहा है जबकि जनसँख्या का एक बड़ा हिस्सा हिंदी भाषी है |लेकिन हम अंग्रेजी बोंलने को एक हाई सोसाइटी से जुड़ाव का माध्यम मानने लगे हैं | मुझे कुकिंग, घूमने एवम लिखने का शौक है मै ज्यादातर हिंदी भाषा , मोटिवेशनल कहानी, और फेमस लोगों के बारे में लिखती हूँ |

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