सी. टी. बी. टी. पर 600 शब्दों में निबंध, भाषण । 600 Words Essay speech on CTBT in Hindi

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सी. टी. बी. टी. पर 600 शब्दों में निबंध, भाषण । 600 Words Essay speech on CTBT in Hindi

सी. टी. बी. टी. से जुड़े छोटे निबंध जैसे सी. टी. बी. टी. पर  600 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  600 Words Essay speech on CTBT in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

600 Words Essay Speech on CTBT in Hindi for Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

एक बार किसी ने परमाणु बम के जनक अलबर्ट आइंसटीन से पूछा, “तीसरा विश्वयुद्ध कब होगा?” आइंसटीन ने कहा, “तीसरा विश्वयुद्ध कब होगा, यह तो मैं नहीं जानता, लेकिन अगर तीसरा विश्वयुद्ध परमाणु आयुधों से लड़ा गया, तो मानव-सभ्यता समूल नष्ट हो जाएगी। इसके बाद चौथा विश्वयुद्ध निश्चित ही लाठियों और पत्थरों से लड़ा जाएगा।”

आइंसटीन का यह कथन परमाणु युद्ध की महाविभीषिका पर अत्यंत सटीक टिप्पणी और संपूर्ण मानवता के लिए एक गंभीर चेतावनी है, क्योंकि जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर एक छोटे से परमाणु आयुध का तांडव विश्व देख चुका है। वर्तमान में मात्र अमेरिका के पास परमाणु आयुधों का इतना बड़ा जखीरा है, जिससे इस पृथ्वी जैसी 50 पृथ्वी का विनाश हो सकता है।

वर्तमान परमाणु युद्ध का मतलब वह युद्ध नहीं है, जिन्हें दुनिया ने अब तक देखा है। पिछले युद्धों में एक पक्ष जीता है और दूसरा पक्ष हारा है। लेकिन अगर अब परमाणु युद्ध हुआ, तो इसमें कोई संदेह नहीं कि न हारने वाला बचेगा और न जीतने वाला। जब दोनों पक्षों का अस्तित्व मिट जाएगा, तो ऐसे युद्ध का लाभ किसको मिलेगा और हानि किसको होगी ? पृथ्वी पर पशु-पक्षी, पेड़-पौधे और जीव-जंतु कुछ भी नहीं बचेंगे। अतएव आज विश्व के प्रत्येक व्यक्ति का परमाणु आयुधों के भय से चिंतित होना लाजिम है।

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600 Words Essay speech on CTBT in Hindi

भारत प्रारंभ से ही शांति और अहिंसा का पुजारी रहा है। ऐसे में वह विश्व शांति के लिए उठाए गए किसी भी कदम का स्वागत करता है, बशर्ते कि शांति प्रयास खत्म न हो। 1954 में सर्वप्रथम भारत ने परमाणु अप्रसार के बारे में विश्व मंच पर अपनी आवाज उठाई थी और 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में सी.टी.बी.टी. अर्थात व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि का सह-प्रस्तावक देश बना। सी.टी.बी.टी. का प्रारूप तैयार करने के लिए सन 1996 में तदर्थ समिति गठित की गई। इस समिति के अध्यक्ष नीदरलैंड के जैप रामेकर थे।

उन्होंने जून, 1996 में सी.टी.बी.टी. के प्रावधानों को अंतिम रूप दिया। ये प्रावधान भारत के हित में नहीं थे। फलत: भारत ने संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में सी. टी.बी.टी. के प्रस्तावों का प्रबल विरोध किया। भारत का मानना है कि सी.टी.बी.टी. का वर्तमान स्वरूप अंतर्राष्ट्रीय कानून के विपरीत है। इससे परमाणु निरस्त्रीकरण का संपूर्ण उद्देश्य पूरा नहीं होता, क्योंकि सी.टी.बी.टी. में परमाणु संपन्न राष्ट्रों के पास जो अतुल परमाणु आयुध है, उनके विनाश के लिए कोई प्रस्ताव नहीं है। द्वितीय, सी.टी.बी.टी. परमाणु परीक्षण के परंपरागत तरीकों पर रोक लगाती है। अत्यंत विकसित राष्ट्र परमाणु परीक्षण पर चुप्पी साधे हुए हैं। इसका सीधा लाभ कुछ परमाणु संपन्न राष्ट्रों को मिलेगा।

आज विश्व दो स्तरों में विभाजित है-प्रथम, विकसित देश और द्वितीय, विकासशील देश । विकसित देश अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन परमाणु संपन्न राष्ट्र हैं। विकासशील देश परमाणु शक्ति प्राप्त करने की दहलीज पर हैं। भारत इस दहलीज पर दस्तक देता हुआ एक प्रमुख राष्ट्र हैं। इस कारण यह सी.टी.बी.टी. से काफी प्रभावित है। सी.टी.बी.टी. का स्वरूप विकासशील देशों को परमाणु संपन्न बनाने से रोकता है, लेकिन परमाणु संपन्न राष्ट्रों पर रोक लगाने में असफल है। इस संधि से परमाणु संपन्न राष्ट्र दिनो-दिन शक्तिशाली होते जाएंगे और विकासशील देश कमजोर पड़ते जाएंगे। विश्व के शांति संतुलन में निरंतर अंतर बढ़ता चला जाएगा और एक खास देश की दादागिरी बनी। रहेगी। परोक्षत: वर्तमान सी.टी.बी.टी. का यही उद्देश्य सामने आया है।

भारत चाहता है कि सी.टी.बी.टी. के वर्तमान स्वरूप में परिवर्तन लाया जाए, जिससे परमाणु संपन्न राष्ट्र निर्धारित समय सीमा के अंदर अपने परमाणु आयुधों को नष्ट करें और भविष्य में किसी भी प्रकार का परमाणु परीक्षण न करें, तभी सी.टी.बी.टी. का मूल उद्देश्य अर्थात पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण प्राप्त हो सकेगा। लेकिन विश्व के कुछ विकसित राष्ट्रों को यह सुधार प्रस्ताव नामंजूर रहा हैं। वे भारत पर चारों ओर से दबाव डाल रहे हैं।

11 एवं 13 मई, 1998 को भारत ने पांच सफल परमाणु परीक्षण किए थे। ऐसे में विकसित राष्ट्रों द्वारा भारत के विरुद्ध लगाए विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध इसी भावना के संकेत हैं। यह प्रसन्नता की बात है कि इन पांच सफल परमाणु परीक्षणों के उपरांत भारत को भी परंपरागत तरीकों से अर्थात थल, जल एवं जमीन के अंदर परमाणु परीक्षण करने की आवश्यकता नहीं रह गई है। संक्षेप में, जब तक सी.टी.बी.टी. से प्राप्त हितों पर कुठाराघात होता रहेगा, तब तक भारत का इस संधि पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं होगा।

FAQ:-

CTBT क्या है? भारत का इस संधि से क्या संबंध है?

CTBT यानी कॉम्प्रिहेंसिव टेस्‍ट बैन ट्रीटी (व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि)। दुनिया भर के देशों के बीच एक ऐसा समझौता, जिसके जरिए विभिन्‍न राष्‍ट्रों को परमाणु परीक्षण करने से रोका जा सके। व्‍यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि पर भारत ने अभी तक हस्‍ताक्षर नहीं किया है।

भारत ने सीटीबीटी पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किया?

भारत का यह मानना है कि इस संधि के बिंदु परमाणु संपन्‍नता को लेकर देशों के बीच भेदभाव करने वाले हैं। यही वजह है कि भारत ने अभी तक CTBT पर हस्‍ताक्षर नहीं किया है।

वर्तमान समय में CTBT में कितने देश शामिल हैं?

वर्तमान में 183 देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिनमें से 164 देशों ने इस संधि का अनुसमर्थन भी कर दिया है।

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