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रवींद्रनाथ टैगोर पर  600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण । 600-700 Words Essay speech on Rabindranath Tagore  in Hindi

रवींद्रनाथ टैगोर पर  600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण । 600-700 Words Essay speech on Rabindranath Tagore  in Hindi

रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़े छोटे निबंध जैसे रवींद्रनाथ टैगोर पर  600-700 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11,और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  600-700 Words Essay speech on Rabindranath Tagore  in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

600-700 Words Essay Speech on Rabindranath Tagore  in Hindi for Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

विश्व विश्वविख्यात नोबल पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय तथा ‘जन गण मन…’ राष्ट्रीय गीत के रचयिता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, सन 1862 को भारत की महानगरी कोलकाता में हुआ था। इनके पिता महर्षि देवेंद्रनाथ ठाकुर थे। ठाकुर परिवार में लक्ष्मी वास करती थी। अतः रवींद्रनाथ ठाकुर का बचपन बड़े घर के बच्चों की तरह नौकरों की देख-रेख में बीता। इनकी मां बचपन में ही चल बसी थीं, जिससे इन्हें मां के आंचल का स्नेह नहीं प्राप्त हुआ। परंतु इन्होंने इसे भगवान की मर्जी समझा।

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई थी। घर पर हर विषय के अलग-अलग शिक्षक रखे गए थे। वे अत्यंत प्रतिभावान एवं मेधावी छात्र थे। इनकी लेखनी से पहली कविता ‘अभिलाषा’ प्रस्फुटित हुई। इस प्रकार साहित्य के क्षेत्र में इन्होंने जो कदम बढ़ाया, वह आजीवन बढ़ता ही रहा। इन्होंने अनेक कहानियों एवं उपन्यासों की भी रचना की।

चालीस वर्ष की अवस्था में गुरुदेव पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा। इनकी पत्नी का आकस्मिक देहांत हो गया तथा पुत्र-पुत्री की मृत्यु हो गई। इससे रवींद्रनाथ ठाकुर का हृदय संसार से विरक्त हो गया। ये एकांतवासी होकर साहित्य साधना में तल्लीन हो गए। कवि के शब्दों को हृदय का दर्द मिला। फलतः कवि की लेखनी से ‘गीतांजलि’ की मर्मस्पर्शी पंक्तियां फूट पड़ीं। इस विषय में कविवर सुमित्रानंदन पंत ने लिखा है- वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान, उमड़कर आंखों से चुपचाप, बही होगी कविता अनजान।

‘गीतांजलि‘ को विश्व-साहित्य में स्थान मिला। इसके लिए रवींद्रनाथ ठाकुर को ‘नोबल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया । इनकी अन्य महत्वपूर्ण रचनाएं हैं-‘घर वापसी’, ‘काबुली वाला’, ‘पोस्ट मास्टर’, ‘तीन पुरुष’, ‘घर और बाहर’, ‘राजर्षि’, ‘गोरा’ आदि। इसके अलावा रवींद्र बाबू एक सफल चित्रकार भी थे। देश-प्रेम की भावना तो इनमें कूट-कूटकर भरी हुई थी।

रवींद्रनाथ ठाकुर को स्कूल की वर्तमान व्यवस्था अच्छी नहीं लगी। वे स्कूलों की तुलना कल-कारखाने से करते थे। जैसे घंटी बजते ह कारखाने खुले जाते हैं, वैसे ही घंटी लगने से स्कूल खुल जाते हैं। अत: अपनी सोच के अनुरूप एक आदर्श विद्यालय ‘शांति निकेतन’ की स्थापना की, जो आज ‘विश्वभारती विश्वविद्यालय’ का रूप ले चुका है।

7 अगस्त, 1941 को इस महामानव का पार्थिव शरीर हमारे बीच से उठ गया। लेकिन इनकी कृतियां आज भी इन्हें अमर बनाए हुए हैं। कहा भी गया है, “जो कीर्तिशाली है, वही जीवित है।”

600-700 Words Essay speech on Rabindranath Tagore

रविंद्र नाथ टैगोर के अनमोल वचन – Rabindranath Tagore Quotes in Hindi

# मिट्टी से मुक्त हो जाना पेड़ के लिए आजादी नही होती

# यदि आप गलतियों के लिए अपने दरवाजे बंद करते है तो सत्य अपने आप बाहआ जायेगा

# फूल को तोड़कर आप उनकी खूबसूरती को इक्कठा नही कर सकते

# जो दुसरो की भलाई के लिए हमेसा व्यस्त रहते है वे अक्सर अपने लिए समय नही निकाल पाते है

# उच्च शिक्षा के जरिये सिर्फ जानकारी ही नही प्राप्त कर सकते है बल्कि जीवन कैसे आसान हो और कैसे सफल बने इसका मार्ग प्रशस्त्र करती है.

# कर्म करते हुए हमेसा आगे बढ़ते रहिये और फल के लिए व्यर्थ चिंता नही करिए और किया हुआ परिश्रम कभी व्यर्थ नही जाता है

# हम हमेसा यह प्रार्थना ना करे की हमारे ऊपर कभी भी किसी प्रकार की कोई बाधा या दिक्कत आये बल्कि हमे ईश्वर से यही प्रार्थना करे की हम उन दुखो का निडरता से उनका सामना करे

# हमें आजादी तभी मिलती है जब हम इसकी कीमत चुका देते है

प्रसन्न रहना सरल है लेकिन सरल रहना यह बहुत ही कठिन है

# मनुष्य की सेवा भी ईश्वर की सेवा है

# कला के जरिये व्यक्ति खुद की पहचान उजागर करता है वस्तुओ की नही

# आस्था वह पक्षी है जो अँधेरे में भी उजाले की शक्ति महसूस करती है

# प्रत्येक शिशु जन्म लेकर यही संदेश लेकर आता है की ईश्वर अभी भी मनुष्यों से निराश नही हुआ है

# मित्रता की गहराई सिर्फ उसके परिचय पर निर्भर नही करती है

# फूल भले ही अकेला होता है लेकिन काँटों से कभी भी इर्ष्या नही करता है

# मूर्ति का टूटकर धूल में मिल जाना यह दिखलाता है ईश्वर के धूल की कीमत आपके मूर्ति से कही अधिक है

# हम दुनिया में तभी जीते है जब दुनिया से प्रेम करते है

# जब खुद पर हसता हु तो मेरे ऊपर का बोझ कम हो जाता है

# यदि आप कठिनाई से मुह मोडकर भागते है तो यही स्वप्न बनकर आपके नीद में बाधा डालती है

# किसी बच्चे की शिक्षा सिर्फ अपने समय तक मत रखिये क्युकी उसका जन्मकाल और आपका जन्मकाल दोनों में बहुत अंतर है

# पृथ्वी द्वारा स्वर्ग से बातचीत करने का माध्यम होते है ये पेड़

# तितली महीने नही बल्कि प्रति क्षण की गिनती करती है जिसके कारण उसके पास पर्याप्त समय होता है

# हम महानता के सबसे नजदीक तब होते है जब हम विनम्र होते है

# मौत प्रकाश को खत्म नही करता बल्कि यह दिखलाता है सुबह हो गयी है अब दीपक बुझाना है

# प्रेम का स्वप्न आने के बाद भी आप की नीद नही खुलती तो आपका जीवन धिक्कार है

# जो पत्तियों से वृक्ष लदा होता है उसमे फल मुश्किल से ही आते है

# जीवन हमे ईश्वर द्वारा दिया गया है जिसे हम कमाते है

# प्रेम कभी भी अधिकार नही जताता है बल्कि यह जीने की स्वतंत्रता देता है

# संगीत दो आत्माओ के बीच की दुरी को खत्म कर देता है

# उपदेश देना तो बहुत आसान है लेकिन उपाय बताना बहुत ही कठिन

# जो कुछ भी हमारा होता है वह हमारे पास जरुर आता है क्युकी हम उसे ग्रहण करने की क्षमता रखते है

# जो मन की पीड़ा को दुसरो से नही बता पाते उन्हें ही गुस्सा सबसे अधिक आता है

# जिस तरह घोसला सोते हुए पक्षी को आश्रय देता है ठीक उसी तरह मौन हमारी वाणी को आश्रय देता है

# विद्यालय वह कारखाने है जिनमे महापुरुषों का निर्माण होता है जिनमे अध्यापक कारीगर होते है

# बर्तन में रखा पानी चमकता है जबकि समुद्र का पानी अस्पष्ट होता है यानी छोटे सत्य तो आसानी से बताये जा सकते है जबकि महान सदैव मौन ही रहता है

# ईश्वर भले ही बड़े बड़े साम्राज्य से उब जाता है लेकिन छोटे छोटे फूलो से कभी रुष्ट नही होता है

# धूल अपना अपमान सहने की क्षमता रखती है और बदले में फूलो का उपहार देती है

# यदि हमारे अंदर प्रेम नही हो तो यह दुनिया हमे कारागार ही लगती है

रविंद्र नाथ टैगोर के अनमोल वचन – Rabindranath Tagore Quotes in Hindi

FAQ

रविंद्र नाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार क्यों मिला?

रवींद्रनाथ टैगोर केनोबेल पुरस्कार उनके कविता-संग्रह गीतांजलि के लिए मिला था.

रविंद्र नाथ टैगोर बड़े होकर कौन सा स्कूल खोलना चाहते थे?

रविंद्र नाथ टैगोर बड़े होकर ब्रह्मचर्य विद्यालय खोलना चाहते थे.

रविंद्र नाथ टैगोर ने सर की उपाधि कब लौटाई?

3 अप्रैल 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोधस्वरूप उन्होंने नाइटहुड की उपाधि ब्रिटिश सरकार को लौटा दी।

रविंद्र नाथ टैगोर के कितने बच्चे थे?

रविंद्र नाथ टैगोर के पांच बच्चे थे.

रविंद्र नाथ टैगोर का जन्म कब और कहां हुआ था?

रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ।

शांति निकेतन के संस्थापक कौन हैं?

रविंद्र नाथ टैगोर

रवींद्रनाथ टैगोर के पिता का क्या नाम है?

रवींद्रनाथ टैगोर के पिता का नाम देवेन्द्रनाथ था .

रवींद्रनाथ टैगोर की जाति क्या थी?

बंगाली

रवींद्रनाथ टैगोर की पत्नी का क्या नाम था?

रवींद्रनाथ टैगोर की पत्नी का नाम मृणालिनी था

रविंद्र नाथ टैगोर कब मरे?

7 अगस्त, 1941

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जयशंकर प्रसाद पर  600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण 

मै आशा करती हूँ कि  रवींद्रनाथ टैगोर पर लिखा यह निबंध ( रवींद्रनाथ टैगोर पर  600-700 शब्दों में  निबंध,भाषण । 600-700 Words Essay speech on Rabindranath Tagore  in Hindi ) आपको पसंद आया होगा I साथ ही साथ आप यह निबंध/लेख अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ जरूर साझा ( Share) करेंगें I

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नमस्कार , मेरा नाम अंजू वर्मा है | मै उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव से हूँ | मै हिंदी भाषा में पोस्ट ग्रेजुएट हूँ| हिंदी साहित्य में मेरा जुड़ाव बचपन से ही रहा है इसीलिए मैंने परास्नातक के लिये हिंदी को ही एक विषय के रूप में चुना |अंग्रेजी के इस दौर में जहाँ हिंदी एक स्लोगन बनता जा रहा है जबकि जनसँख्या का एक बड़ा हिस्सा हिंदी भाषी है |लेकिन हम अंग्रेजी बोंलने को एक हाई सोसाइटी से जुड़ाव का माध्यम मानने लगे हैं | मुझे कुकिंग, घूमने एवम लिखने का शौक है मै ज्यादातर हिंदी भाषा , मोटिवेशनल कहानी, और फेमस लोगों के बारे में लिखती हूँ |

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