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देश-प्रेम पर 600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण । 600-700 Words Essay speech on Patriotism in Hindi

देश-प्रेम पर 600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण – 600-700 Words Essay speech on Patriotism in Hindi

देश-प्रेम से जुड़े छोटे निबंध जैसे देश-प्रेमपर  600-700 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम 600-700 Words Essay speech on Patriotism in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

600-700 Words Essay Speech on Patriotism in Hindi for Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

देशप्रेमी को देश का अभिमान होता है और जिसमें देशाभिमान होता है, वह निःसंदेह देशभक्त होता है। एक सच्चे देशभक्त के लिए देश से बड़ा कुछ नहीं होता। वह स्वजन-परिजन, माता-पिता, भाई-बहन एवं धन-दौलत आदि के विपरीत अपनी जन्मभूमि को ही सबसे बड़ी चीज मानता है। उसका हृदय स्वदेश प्रेम से भरा होता है। कवि के हृदय में स्वदेश-प्रेम की भावना से रहित व्यक्ति के लिए कितना घृणा-भाव है, यह निम्नलिखित पंक्तियों में देखें जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं, वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।

जिसके हृदय में स्वदेश-प्रेम है, यदि उसके स्वदेश पर कोई भी कुदृष्टि डालता है या उसके अपमान का दुस्साहस करता है, तो वह प्राणों की बाजी लगाकर बदला लेता है। हंसते-हंसते फांसी के तख्ते पर लटक जाता है। उसे न तो सागर की गहराई पर संदेह होता है और न ही पर्वत की हिम शृंखलाओं का भय। देशहित के लिए जीवन का बलिदान ही उसका लक्ष्य होता है।

स्वदेश का गौरव और गर्व प्रतिपल हमारे अंतस में त्याग तथा कर्तव्य परायणता की अमर भावना सुदृढ़ करते हैं। तभी तो देशहित की भावना का उफान आने पर हमें न तो राजप्रासादों का वैभव रोक पाता है और न ही पत्नी का प्यार बाधक बनता है। एक अलौकिक तेज से हमारी इंद्रियां दमक उठती हैं। हमें न तो अकाल मृत्यु का भय रहता है और न ही पुनर्जन्म की आशंका। हर घड़ी हमारे सामने स्वदेश के सम्मान तथा उत्थान का प्रश्न उपस्थित रहता है और उसी की पूर्ति में हम अपना सर्वस्व समर्पण करके धन्य होते हैं।

महाराणा प्रताप ने घास की रोटियां खाई और भयानक वन प्रदेशों में भटके, परंतु मुगलों से संघर्ष करके अपनी मातृभूमि मेवाड़ का गौरव अंतिम क्षण तक मिटने नहीं दिया। देश की स्वाधीनता के लिए कोटिशः शहीदों की स्मृतियां हमारे अंतस में रोमांच पैदा करती हैं। लाला लाजपत राय, सरदार भगत सिंह आदि के नाम कभी भुलाए नहीं जा सकते। भारत के स्वाधीनता संग्राम का इतिहास इन देशभक्तों को गाथाओं से भरा पड़ा है। मानवजातिक पर पुष्पहार चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित करने में स्वाभिमान समझती है। इनके कृत्यों को सुनकर नतमस्तक हो जाते हैं। उनका यशसभर पवन के साथ बिखरकर देशहित में मर-मिटने की प्रेरणा देने लगता है।

एक स्वदेश प्रेमी को स्वदेश की प्रत्येक वस्तु प्राणों से बढ़कर लगती है। प्रत्येक देशवासी उसका आत्मीय हो जाता है। स्वदेश के कण-कण से उसको आत्मीयता हो जाती है। वह देश के लिए त्याग और बलिदान करने में अपने जीवन की सार्थकता समझता है। इसकी सुरक्षा के लिए वह बलिवेदी पर मर मिटना चाहता है। यह भावना निम्नवत पंक्तियों से प्रकट होती है मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक, मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जाते वीर अनेक।

जब स्वदेश प्रेम और संपूर्ण राष्ट्र हमारे जीवन की इकाई बन जाता है, तब हम उसी की सामूहिक उन्नति के लिए प्रयत्नशील हैं, उसके आर्थिक उत्थान के लिए पर्याप्त शारीरिक परिश्रम करते हैं और राजनीतिक समस्याओं को सुलझाने के लिए भ्रातृत्व भाव को स्थान देते हैं। पारस्परिक झगड़ों को समाप्त कर सहयोग से रहने लगते हैं। अनेक प्रकार से देश के बहुमुखी विकास के लिए प्रयास करने में ही अपने लक्ष्य की प्राप्ति समझते हैं। जिन देशवासियों में स्वदेश प्रेम होता है, उनकी शक्ति के आगे पूरा विश्व झुक जाता है।

भारतीय इतिहास देशभक्तों की चर्चाओं से भरा पड़ा है। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, गुरु गोविंद सिंह, महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, तिलक, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सरोजिनी नायडू आदि के देश-प्रेम से आज हम स्वाधीनता का गौरव प्राप्त कर सके। इसके पीछे इन विभूतियों के जीवन की कितनी गाथाओं की चर्चा है और कितने शहीदों के प्राण-त्याग की कहानियां हैं-इतिहास इसका ज्वलंत उदाहरण है, जो युग-युग तक हम भारतीयों में स्वदेश-प्रेम का उत्कर्ष करता रहेगा।

हमें यह सदैव ध्यान रखना चाहिए कि देशभक्तों की कीर्ति मानव जाति को अमर पाठ पढ़ाती रहती है। विश्व उनके नाम का स्मरण करके धन्य होता है। पृथ्वी पर ईश्वर की भांति उनकी पूजा होती है इसके विपरीत विद्रोही सर्वत्र अपमानित होते हैं। निष्कर्षतः यह कहना उचित है कि देश की रक्षा और सम्मान का ध्यान रखना मानव का परम धर्म है।

600-700 Words Essay Speech on Patriotism

देश-प्रेम अनमोल वचन | Desh-Prem Quotes in Hindi

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भारत माता तेरी गाथा,
सबसे ऊँची तेरी शान,
तेरे आगे शीश झुकायें,
दे तुझको हम सब सम्मान।

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गंगा यमुना यहाँ नर्मदा,
मंदिर मस्जिद के संग गिरजा,
शांति प्रेम की देता शिक्षा,
मेरा भारत सदा सर्वदा।

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चढ़ गये जो हंसकर सूली,
खाई जिन्होंने सीने पर गोली,
हम उनको प्रणाम करते हैं।
जो मिट गये देश पर,
हम सब उनको सलाम करते हैं।

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दे सलामी इस तिरंगे को
जिस से तेरी शान हैं,
सर हमेशा ऊँचा रखना इसका
जब तक दिल में जान हैं..!!

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इश्क तो करता है हर कोई,
महबूब पे मरता है तो हर कोई,
कभी वतन को महबूब बना कर देखो
तुझ पे मरेगा हर कोई ……….!!!

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ऐ मेरे वतन के लोगों
तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का
लहरा लो तिरंगा 🇳🇪 प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये….

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कुछ नशा तिरंगे की आन का है,
कुछ नशा मातृभूमि की शान का है,
हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा,
नशा ये हिंदुस्तान की शान का है.

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खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं,
मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं,
करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों,
तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है.

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खून से खेलेंगे होली,
अगर वतन मुश्किल में है,
सरफरोशी की तमन्ना,
अब हमारे दिल में है,
आओ मिलकर करे देश को सलाम,
बोलो मेरा भारत महान ……!!!

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चलो फिर से आज वो नजारा याद कर लें,
शहीदों के दिल में थी
वो ज्वाला याद करले,
जिसमे बहकर आज़ादी पहुची थी किनारे पे,
देशभक्तों के खून की वो धरा याद कर लें.

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ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई ,
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता ,
नोटों में भी लिपट कर,
सोने में सिमटकर मरे हे कई ,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता

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जिंदगी जब तुझको समझा,
मौत फिर क्या चीज है
ऐ वतन तू हीं बता,
तुझसे बड़ी क्या चीज है.

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जो अब तक ना खौला,
वो खून नहीं पानी है,
जो देश के काम ना आये,
वो बेकार जवानी है

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देश को आजादी के नए अफसानों की जरूरत है
भगत-आजाद जैसे आजादी के दीवानों की जरूरत है,
भारत को फिर देशभक्त परवानों की जरूरत है.

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दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान है,
सिर हमेशा ऊँचा रखना इसका जब तक दिल में जान है।

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मैं भारत बरस का हरदम सम्मान करता हूँ,
यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

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ज़माने भर में मिलते हैं आशिक कई ,
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता,
नोटों में भी लिपट कर,
सोने में सिमट कर मरे हैं कई ,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता।
आओ नमन करें उन शहीदों का
जो हुए हैं कुर्बान इस ज़ज्बे से और
हमें दे गए हैं यह आज़ादी तोहफे में।

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अनेकता में एकता ही
इस देश की शान है,
इसीलिए मेरा भारत महान है

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न मरो सनम बेवफा के लिए,
दो गज जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए,
मरना है तो मरो वतन के लिए,
हसीना भी दुपट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए.

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मुझे ना तन चाहिए,
ना धन चाहिए बस अमन से भरा यह वतन चाहिए
जब तक जिन्दा रहूं,
इस मातृ-भूमि के लिए और
जब मरुँ तो तिरंगा कफ़न चाहिये

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मेरा “हिंदुस्तान” महान था, महान है और महान रहेगा,
होगा हौसला बुलंद सब के ड़ों में बुलंद तो
एक दिन पाक भी जय हिन्द कहेगा.

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मेरे मुल्क की हिफाज़त ही मेरा फ़र्ज है और
मेरा मुल्क ही मेरी जान है ,
इस पर कुर्बान है मेरा सब कुछ ,
नही इससे बढ़कर मुझको अपनी जान है।।

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मैं भारत बरस का हरदम सम्मान करता हूँ,
यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हुँ,
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ.

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मैं भारतवर्ष का हरदम अमिट सम्मान करता हूँ
यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

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ये बात हवाओ को भी बताये रखना,
रौशनी होगी चिरागों को जलाये रखना,
लहू देकर जिसकी हिफाज़त हमने की ..
ऐसे तिरंगे को सदा दिल में बसाये रखना .

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लिख रहा हूं मैं अजांम जिसका कल आगाज आयेगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा इकंलाब लाऐगा
मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि,
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा

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वतन हमारा ऐसे न छोड़ पाए कोई,
रिश्ता हमारा ऐसे न तोड़ पाए कोई,
दिल हमारे एक है एक है हमारी जान,
हिंदुस्तान हमारा है, हम है इसकी शान.

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शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पे मर मिटने वालों का बाकी यही निशां होगा

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भारत भूमि है महान, इसकी मिट्टी मेरा मान,
इसके गली और कूचे पल-पल भूले न भूलें,
रंग यहाँ के हैं दो-चार, भारत भूमि है महान,
माटी की सोंधी खुशबू लिए तितलियाँ घूमे चारों ओर,
इसकी भीनी खूशबू फैलायें चारो ओर
भारत भूमि है महान, इसकी मिट्टी मेरा मान।

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इस तिरंगे को कभी मत तुम झुकने देना,
देश की बढ़ती शान को तुम कभी न रुकने देना,
यही अरमान है बस अब इस दिल में, कि ऐसे ही आगे तुम बढ़ते रहना।

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मेरा भारत सब देशों से महान है।
नहीं है ऐसा कोई अन्य देश,
युगों बीतने पर भी वैसा ही है परिवेश,
विभिन्नता में एकता के लिए, प्रसिद्ध है हर प्रदेश,
प्रेम, अहिंसा, भाईचारे का जो है देता संदेश।

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न पूछो ज़माने को,
क्या हमारी कहानी है,
हमारी पहचान तो सिर्फ ये है,
की हम सिर्फ हिन्दुस्तानी हैं ……!!!

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अपनी आज़ादी को हम
हरगिज़ मिटा सकते नहीं
सर कटा सकते हैं लेकिन
सर झुका सकते नहीं

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आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे
शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे
बची हो जो एक बूंद भी
लहू की तब तक भारत माता का आँचल
नीलाम नहीं होने देंगे

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मै आशा करती हूँ कि देश-प्रेम पर लिखा यह निबंध ( देश-प्रेम पर  600-700 शब्दों में निबंध,भाषण । 600-700 Words Essay speech on Patriotism in Hindi) आपको पसंद आया होगा I साथ ही साथ आप यह निबंध/लेख अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ जरूर साझा (Share) करेंगें I

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