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गोस्वामी तुलसीदासपर  600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण । 600-700 Words Essay speech on Goshwami Tulsidas in Hindi

गोस्वामी तुलसीदासपर  600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण । 600-700 Words Essay speech on Goshwami Tulsidas in Hindi

गोस्वामी तुलसीदाससे जुड़े छोटे निबंध जैसे डॉ. हरिवंश राय बच्चनपर  600-700 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11,और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  600-700 Words Essay speech on Goshwami Tulsidas  in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

600-700 Words Essay Speech on Goshwami Tulsidas  in Hindi for Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

सच मानो तुलसी न होते तो हिंदी कहीं पड़ी होती, उसके माथे पे रामायण की बिंदी नहीं जड़ी होती

हिंदी-वांग्मय के ललाट पर ‘रामचरित मानस’ की कालजयी चमचमाती बिंदी जड़ने वाले महाकवि तुलसीदास से भला कौन अपरिचित है? ग्रियर्सन ने बुद्ध के बाद इन्हें ही सबसे बड़ा लोकनायक माना है। लेकिन तुलसीदास जी हिंदी भाषी क्षेत्रों में बुद्ध से भी बढ़कर लोकनायक हैं। इतिहासकार स्मिथ ने इन्हें अकबर के समान महान बताया है। लेकिन अकबर की स्मृतियां कुछ भवनों और किलों के साथ जाती रहेंगी, परंतु तुलसीदास अपनी कालजयी कृतियों के कारण जन-जन के बीच हमेशा श्रद्धापूर्वक याद किए जाते रहेंगे।

ऐसे महान संत लोकनायक तुलसीदास का जन्म संवत् 1588 की भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम तथा माता का नाम हुलसी था। इनका परिचय रहीम के इस दोहे से मिलता है

सुरतिय नरतिय नागतिय यह जानत सब कोय। गोद लिए हुलसी फिरे तुलसी से सुत होय ॥

बचपन में ही माता-पिता की छत्रछाया हट जाने से तुलसीदास अनाथ हो गए। इन्होंने स्वयं अपने बारे में लिखा है, “मांगकर खाना और मंदिर में सोना मेरी दिनचर्या थी।” बड़े होकर इन्होंने नरहरिदास से दीक्षा ली और रामभक्त बन गए। काशी में रहकर इन्होंने संस्कृत साहित्य का गहन अध्ययन किया। पत्नी रत्नावली की फटकार के बाद ये संन्यासी बन गए और विभिन्न तीर्थों का भ्रमण करने लगे। इसी क्रम में अनेक संतों से समागम भी हुए। ये श्रीराम के इतने बड़े भक्त हो गए कि सृष्टि के कण-कण में इन्हें वे दिखाई पड़ते थे

सियाराममय सब जग जानी। करहुं प्रनाम जोरि जुग पानी ॥

गोस्वामी तुलसीदास एक सिद्ध संत थे। इनकी सिद्धि की कहानियां आज भी अयोध्या, काशी और चित्रकूट की गलियों में सुनने को मिलती हैं। जीवन के अंतिम क्षण इन्होंने काशी के असी घाट पर बिताए और तकिया मोक्ष के संबंध में यह दोहा प्रचलित है

संवत् सोलह सौ असो, असी गंग के तौर। सावन शुक्ला सप्तमी, तुलसी तज्यो शरीर

तुलसीदास की लेखनी से अनेक कालजयी रचनाएं निःसृत हुई हैं। इन् कुछ प्रसिद्ध रचनाएं हैं- ‘रामचरित मानस’, ‘विनय पत्रिका’, ‘कवितावली’ ‘दोहावली’, ‘पार्वती मंगल’, ‘जानकी मंगल’, ‘ श्रीकृष्ण गीतावली’, ‘बरवैया रामायण’, ‘रामाज्ञा प्रश्न’, ‘हनुमान चालीसा’, ‘हनुमान बाहुक’, ‘रामलालन छहू’ इत्यादि।

इनकी रचनाओं में भाषा बड़ी सरल, सहज और सरस है। इनका शब्द भंडार विशाल है। अपनी रचनाओं में इन्होंने संस्कृत, अरबी, फारसी, उर्दू और क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दों का भरपूर प्रयोग किया है। इनकी चौपाइयाँ, दोहे एवं सोरठे आदि गेय और काव्य की कसौटी पर पूर्णत: खरे उतरे हैं।

तुलसीदास की कृतियों में सबसे अधिक लोकप्रियता ‘रामचरित मानस’ को मिली। इस ग्रंथ में ज्ञान, भक्ति और कर्म-तीनों का सफल समन्वय हुआ है। यह हिंदुओं के हर घर में पांचवें वेद की भांति पूजित है। इनकी दूसरी प्रमुख रचना ‘विनय पत्रिका’ है। इसमें भक्त द्वारा भगवान को प्रेम पत्र लिखा गया है। इसमें 279 दोहे में भक्ति की शीतल सरिता उमड़ पड़ी है। इनकी अन्य रचनाएं भी चिरस्थायी हैं। ‘हनुमान चालीसा’ की चौपाइयां तो हर हिंदू की जिह्वा पर रहती हैं। महाकवि हरिऔध ने ठीक ही कहा है

कविता करके तुलसी न लसे,कविता लसी पा तुलसी की कलम।

तुलसीदास का आविर्भाव ऐसे समय में हुआ था, जब परतंत्र भारत में हिंदू संस्कृति लुप्त होती जा रही थी। धर्म, जाति एवं संप्रदाय के नाम पर भारतीय समाज खंडित था। लोग हिंदू कहलाने से डरते थे। ऐसे समय में तुलसीदास ने अपनी रचनाओं से लोक चेतना जगाई। समन्वय का विराट रूप प्रस्तुत करके इन्होंने खंडित समाज को एकताबद्ध करने का स्तुत्य प्रयास किया।

अपने नायक श्रीराम को अछूत शबरी के जूठे बेर खिलाकर और केवट से गले मिलाकर इन्होंने छुआछूत के लौह दुर्ग पर वज्र प्रहार किया। ‘कर्म प्रधान विश्व करि राखा’ का शंखनाद करके इन्होंने मरणासन्न हिंदुओं को महामृत्युंजय मंत्र दिया। आज भी तुलसीदास की रचनाएं समाज की विशृंखलित कड़ियों को जोड़ने का कार्य कर रही है। अतः तुलसीदास सर्वकालीन लोक कवि हैं।

600-700 Words Essay speech on Goshwami Tulsidas

तुलसीदास के अनमोल विचार – Tulsidas Quotes In Hindi

जनता सरकार को बनाती है, सरकार जनता को नही। इसलिए सरकार के पिछलग्गू मत बनो। हर छोटे मोटे कार्य हेतु सरकार की मेहरबानियो के गुलाम मत बनो । – गोस्वामी तुलसीदास

जो होना है उसे कोई रोक नहीं जा सकता इसलिए आप सभी आशंकाओं के तनाव से मुक्त होकर अपना काम करते रहो। – गोस्वामी तुलसीदासदास

शत्रु को युद्ध में उपस्थित पा कर कायर ही अपने प्रताप की डींग मारा करते हैं। – गोस्वामी तुलसीदास

स्वाभाविक ही हित चाहने वाले गुरु और स्वामी की सीख को जो सिर चढ़ाकर नहीं मानता ,वह हृदय में खूब पछताता है और उसके हित की हानि अवश्य होती है। – गोस्वामी तुलसीदास

मुखिया मुख के समान होना चाहिए जो खाने-पीने को तो अकेला है, लेकिन विवेकपूर्वक सब अंगों का पालन-पोषण करता है। – गोस्वामी तुलसीदास

मंत्री, वैद्य और गुरु – ये तीन यदि भय या लाभ की आशा से (हित की बात न कहकर) प्रिय बोलते हैं तो (क्रमशः) राज्य,शरीर एवं धर्म – इन तीन का शीघ्र ही नाश हो जाता है। – गोस्वामी तुलसीदास

मीठे वचन सब ओर सुख फैलाते हैं। किसी को भी वश में करने का ये एक मन्त्र होते हैं इसलिए मानव को चाहिए कि कठोर वचन छोडकर मीठा बोलने का प्रयास करे। – गोस्वामी तुलसीदास

मनुष्य की धार्मिक वृत्ति ही उसकी सुरक्षा करती है। – गोस्वामी तुलसीदास

धार्मिक व्यक्ति दुःख को सुख में बदलना जानता है। – गोस्वामी तुलसीदास

धार्मिक वृत्ति बनाये रखने वाला व्यक्ति कभी दुखी नहीं हो सकता और धार्मिक वृत्ति को खोने वाला कभी सुखी नहीं हो सकता। – गोस्वामी तुलसीदास

आग्रह हर समन्वय को कठिन बनाता है, जबकि उदारता उसे सरल। – गोस्वामी तुलसीदास

लक्ष्य निश्चित हो, पाव गतिशील हों तो मंजिल कभी दूर नहीं होता।- गोस्वामी तुलसीदास

धर्म का काम किसी का मत बदलना नहीं , बल्कि मन बदलना है। – गोस्वामी तुलसीदास

सफलता का सबसे बड़ा सूत्र है व्यक्ति का अपना पुरुषार्थ।- गोस्वामी तुलसीदास

मानव वह होता है जो नए पाठ का निर्माण करे। – गोस्वामी तुलसीदास

भावी पीड़ी को संस्कारी बनाए रखना विकास की सशक्त शृंखला है। – गोस्वामी तुलसीदास

चिंता नहीं चिंतन करो- गोस्वामी तुलसीदास

सुंदर वेष देखकर न केवल मूर्ख अपितु चतुर मनुष्य भी धोखा खा जाते हैं। सुंदर मोर को ही देख लो उसका वचन तो अमृत के समान है लेकिन आहार साँप का है। -गोस्वामी तुलसीदास

हे मनुष्य ,यदि तुम भीतर और बाहर दोनों ओर उजाला चाहते हो तो मुखरूपी द्वार की जीभरुपी देहलीज़ पर राम-नामरूपी मणिदीप को रखो। – गोस्वामी तुलसीदास

जो मनुष्य अपने अहित का अनुमान करके शरण में आये हुए का त्याग कर देते हैं वे क्षुद्र और पापमय होते हैं। दरअसल ,उनका तो दर्शन भी उचित नहीं होता। – गोस्वामी तुलसीदास

मनुष्य को दया कभी नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि दया ही धर्म का मूल है और इसके विपरीत अहंकार समस्त पापों की जड़ होता है। मनुष्य को दया कभी नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि दया ही धर्म का मूल है और इसके विपरीत अहंकार समस्त पापों की जड़ होता है। मनुष्य को दया कभी नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि दया ही धर्म का मूल है और इसके विपरीत अहंकार समस्त पापों की जड़ होता है। – गोस्वामी तुलसीदास

प्रलोभन और भय का मार्ग बच्चों के लिए उपयोगी हो सकता है। लेकिन सच्चे धार्मिक व्यक्ति के दृष्टिकोण में कभी लाभ हानि वाली संकीर्णता नहीं होती। – गोस्वामी तुलसीदास

जगाया तो उसी को जा सकता है जो सो रहा हो; किंतु जो जागते हुए भी जानबूझकर सोने का बहाना कर रहा है; उसे जगाने से क्या लाभ?

बिना पानी के बादलों के गरजने से बरसात नहीं होती। सच्चे वीर और पहलवान बेवजह नहीं दहाडते हैं, वे युद्ध में अपना शौर्य दिखाते हैं। गोस्वामी तुलसीदास

मित्र से याचना करने से प्रेम बढ़ता नहीं, घटता है। गोस्वामी तुलसीदास

जो अपनों को त्याग कर दुश्मनों के शिविर में चला जाता है। उसी के पुराने शिविर के अपने ही साथी दुश्मन को मारने के पश्चात उसे भी मार डालते हैं। गोस्वामी तुलसीदास

सम्मान चाहने वाला व्यक्ति मांग नहीं सकता, मांगने वाले का सम्मान नहीं रह सकता। गोस्वामी तुलसीदास

सत्यवादी व्यक्ति कभी झूठे वचन नहीं देते। दिए हुए वचन का पालन करना ही उनकी महानता का चिन्ह होता है। गोस्वामी तुलसीदास

सम्मान की रक्षा भी हो, मांगा भी जाए और प्रियतम का नृत्य नया-नया स्नेह भी बढे – ये तीन विपरीत बातें हैं। गोस्वामी तुलसीदास

पतिव्रता स्त्री के आंसू धरती पर बेकार नहीं गिरते, वे उनका विनाश करते हैं जिनके कारण वश से वे आंखों से बाहर निकलते हैं। गोस्वामी तुलसीदास

किसी भी एक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है:
a उदास व दुखी ना होना
b अपने कर्तव्य के पालन करने की क्षमता
c कठिनाइयों का बलपूर्वक सामना करने की क्षमता

धर्म किसी देश के सभी लोगों को एकजुट रखने में समर्थ होता है। गोस्वामी तुलसीदास

अभिमानी व्यक्ति चाहे वह आपका गुरु, पिता व उम्र अथवा ज्ञान में बड़ा भी हो, उसे सही दिशा दिखाना अति आवश्यक होता है। गोस्वामी तुलसीदास

जिनके पास धर्म का ज्ञान है वे सभी कहते हैं कि सत्य ही परम धर्म है। गोस्वामी तुलसीदास

उत्साह में असीमित शक्ति होती है। गोस्वामी तुलसीदास उत्साहित व्यक्ति के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता। गोस्वामी तुलसीदास

सभी का चेहरा उनकी अंदरुनी विचारधाराओं व भावनाओं का दर्पण होता है। इन विचारधाराओं व भावनाओं को छुपाना लगभग असंभव होता है और देखने वाला उन्हें भाप सकता है। गोस्वामी तुलसीदास

उत्साहहीन, निर्बल व दुख में डूबा हुआ इंसान कोई अच्छा कार्य नहीं कर सकता। अतः वह धीरे-धीरे दुख की गहराइयों में डूब जाता है। गोस्वामी तुलसीदास

पिता, गुरु, ज्येष्ठ भाता जो धर्म पालन का ज्ञान देते हैं वो सभी पिता के समान होते हैं। गोस्वामी तुलसीदास

बड़े कहते हैं कि विद्वानों व बुद्धिमानों से परामर्श ही विजय का आधार होता है। गोस्वामी तुलसीदास

जो इंसान निरंतर सुख करता रहता है, उन्हें जीवन में कभी नहीं सुख मिलता। गोस्वामी तुलसीदास

दुष्टो व राक्षसों से समझौते की बात या नम्र शब्दों से कोई लाभ नहीं हो सकता। इसी प्रकार किसी धनवान व्यक्ति को छोटा मोटा उपहार देकर उसे शांत नहीं किया जा सकता। गोस्वामी तुलसीदास

मैं रिश्तेदारों की आचरण से भली भांति परिचित हूं।वो अपने रिश्तेदारों की परेशानियों में आनंदित होते हैं। गोस्वामी तुलसीदास

दया, सद्भावना और मानवता महान पुण्यकारी गुण है। गोस्वामी तुलसीदास

उदासी अत्यंत बुरी चीज़ होती है। गोस्वामी तुलसीदास हमें कभी भी अपने मस्तिष्क का नियंत्रण उदासी के हाथ में नहीं देना चाहिए। उदासी एक व्यक्ति को उसी प्रकार मार डालती है जैसे की एक क्रोधित सांप किसी बच्चे को। गोस्वामी तुलसीदास

अपने जीवन का अंत कर देने से कोई अच्छाई नहीं होती, सुख और आनंद का रास्ता जीवन से ही निकलता है। गोस्वामी तुलसीदास

राजा बनने के लिए तीन बातों की आवश्यकता होती है
1 गुरु का आशीर्वाद
2 मंत्रियों और साथियों का सहयोग
3 प्रजाजनों का स्नेह और विश्वास

चरित्रहीन व्यक्ति की मित्रता उस पानी की बूंद की भांति होती है; जो कमल के फूल की पत्ती पर होते हुए भी उस पर चिपक नहीं सकता। गोस्वामी तुलसीदास

यदि जीवित रहेंगे तो सुख और आनंद की प्राप्ति कभी-ना-कभी अवश्य होगी। गोस्वामी तुलसीदास

अत्यधिक लंबे समय की दूरी या ओझलपन से प्रेम व स्नेह में कमी आ जाती है। गोस्वामी तुलसीदास

सर्वनाश की प्रमुख कारण इस प्रकार है:
1 दूसरों के धन की चोरी
2 दूसरे की पत्नी पर बुरी नजर
3 और अपने ही मित्र की चरित्र व अखंडता पर शक

धन, सुख, संपत्ति व समृद्धि सभी धर्म के मार्ग में ही प्राप्त होते हैं। गोस्वामी तुलसीदास

उदास न होना, कुंठित न होना अथवा मन को टूटने ना देना ही सुख और समृद्धि का आधार है। गोस्वामी तुलसीदास

वीर व बलवान पुरुष क्रोधित नहीं होते। गोस्वामी तुलसीदास

जो किसी से धन व सामग्री की सहायता लेने के पश्चात अपने दिए हुए वचन का पालन नहीं करता, तो वह संसार में सबसे अधिक बुरा इंसान माना जाता है। गोस्वामी तुलसीदास

समय ही व्यक्ति को सर्वश्रेष्ठ और कमजोर बनाता है। गोस्वामी तुलसीदास

मीठे वचन से चारों ओर सुख फैलाता हैं, किसी को भी वश में करने का ही ये एक मंत्र है इसलिए इंसान को चाहिए कि कठोर वचन छोड़कर मीठे वचन बोलने का प्रयास करें। गोस्वामी तुलसीदास

मुखिया को मुख समान होना चाहिए जो खाने पीने को तो अकेला है लेकिन विवेकपूर्ण तरीके से सब अंगों का पालन पोषण करता है। गोस्वामी तुलसीदास

जो होना है उसे कोई रोक नहीं जा सकता इसलिए आप सभी आशंकाओं के तनाव से मुक्त होकर अपना काम करते रहो। गोस्वामी तुलसीदास

FAQ

तुलसीदास को गोस्वामी क्यों कहा जाता है?

जिसने इन्द्रियों को वश में कर लिया ,जो इन्द्रियों का स्वामी अर्थात् मालिक है , सभी इन्द्रियों को अपने अनुसार चलाता है उसे गोस्वामी कहते हैं । 

तुलसीदास कौन समाज के थे?

तुलसीदास कान्यकुब्ज ब्राह्मण थे।

गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म कब हुआ था?

गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म 13 अगस्त 1532 को हुआ थाI

तुलसीदास जी के बचपन का नाम क्या था?

तुलसीदास जी के बचपन का नाम राम बोला थाI

तुलसीदास के माता पिता का क्या नाम था?

तुलसीदास के माता पिता का नाम हुलसी दुबे और आत्माराम दुबे थाI

गोस्वामी तुलसीदास की मृत्यु कब हुई?

गोस्वामी तुलसीदास की मृत्यु 31 जुलाई 1623 को हुईI

तुलसीदास की भाषा कौन सी है?

तुलसीदास की भाषा अवधी हैI

तुलसीदास की कौन सी रचना ब्रजभाषा में है?

तुलसीदास की रचना गीतावली ब्रजभाषा में हैI

तुलसीदास जी के गुरु कौन माने जाते हैं?

नरहरिदास बाबा तुलसीदास जी के गुरु माने जाते हैंI

रामचरितमानस के कुल कितने कांड है?

रामचरितमानस के कुल सात कांड है। इन सात काण्डों के नाम हैं – बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड (युद्धकाण्ड) और उत्तरकाण्ड।

तुलसीदास की पत्नी का क्या नाम था ?

तुलसीदास की पत्नी का नाम रत्नावली थाI

तुलसीदास की मृत्यु कब और कहाँ हुई थी?

तुलसीदास की मृत्यु सन् 1623 ई० (अससीघाट , वाराणसी) में हुई थी

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मै आशा करती हूँ कि  गोस्वामी तुलसीदासपर लिखा यह निबंध ( गोस्वामी तुलसीदासपर  600-700 शब्दों में  निबंध,भाषण । 600-700 Words Essay speech on Goshwami Tulsidas  in Hindi ) आपको पसंद आया होगा I साथ ही साथ आप यह निबंध/लेख अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ जरूर साझा ( Share) करेंगें I

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सैकण्डरी एजुकेशन की  नई ऑफिशियल वेबसाईट है : cbse.nic.in. इस वेबसाईट की मदद से आप सीबीएसई बोर्ड की अपडेट पा सकते हैं जैसे परिक्षाओं के रिजल्ट, सिलेबस,  नोटिफिकेशन, बुक्स आदि देख सकते है. यह बोर्ड एग्जाम का केंद्रीय बोर्ड है.

संघ लोक सेवा आयोग का एग्जाम कैलेंडर {Exam Calendar Of -UNION PUBLIC COMMISSION (UPSC) लिंक/Link

नमस्कार , मेरा नाम अंजू वर्मा है | मै उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव से हूँ | मै हिंदी भाषा में पोस्ट ग्रेजुएट हूँ| हिंदी साहित्य में मेरा जुड़ाव बचपन से ही रहा है इसीलिए मैंने परास्नातक के लिये हिंदी को ही एक विषय के रूप में चुना |अंग्रेजी के इस दौर में जहाँ हिंदी एक स्लोगन बनता जा रहा है जबकि जनसँख्या का एक बड़ा हिस्सा हिंदी भाषी है |लेकिन हम अंग्रेजी बोंलने को एक हाई सोसाइटी से जुड़ाव का माध्यम मानने लगे हैं | मुझे कुकिंग, घूमने एवम लिखने का शौक है मै ज्यादातर हिंदी भाषा , मोटिवेशनल कहानी, और फेमस लोगों के बारे में लिखती हूँ |

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