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राष्ट्रीय एकता के मूल तत्व पर  600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण । 600-700 Words Essay speech on Fundamentals of National Integration in Hindi

राष्ट्रीय एकता के मूल तत्व पर  600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण – 600-700 Words Essay speech on Fundamentals of National Integration in Hindi

राष्ट्रीय एकता के मूल तत्व से जुड़े छोटे निबंध जैसे राष्ट्रीय एकता के मूल तत्व पर  600-700 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11,और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  600-700 Words Essay speech on Fundamentals of National Integration in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

600-700 Words Essay Speech on Fundamentals of National Integration in Hindi for Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

प्राचीन काल में भारत की राष्ट्रीय एकता का स्वरूप आज से बहुत भिन्न था। उस समय सामंतवादी व्यवस्था थी। छोटे-छोटे राज्यों की भी अपनी अलग स्थिति थी। उस समय की राष्ट्रीयता आज की भांति व्यापक और ठोस नहीं भारत में अनेक राज्य स्थापित थे। कन्याकुमारी से हिमालय तक और असम से सिंध तक भारत की सांस्कृतिक चेतना एक थी। यही एकात्मकता हमारी राष्ट्रीय एकता की नींव थी।

उस समय भी भिन्न-भिन्न क्षेत्रों की अपनी अलग परंपरा, रीति-रिवाज और आस्थाएं थीं, लेकिन समूचा भारत एक सांस्कृतिक सूत्र में आबद्ध था। इसी को अनेकता में एकता कहा जाता है। जैसे शतदल कमल अनेक पंखुड़ियों के मिलन से शोभायमान होता है, वैसे ही भारत अनेक जातियों, भाषाओं एवं विश्वासों के सम्मिलन से रूपाकार था। यही उसकी शोभा थी।

कहने का तात्पर्य यह है कि अनेकता में एकता ही भारत की विशेषता है। यही विशेषता तब भी थी और आज है, किंतु कहीं से कृत्रिम नहीं है। अगर गौर किया जाए, तो पता चलेगा कि अनेकता में ही एकता अपेक्षित है। एक जाति या एक से मनुष्यों में एकता आम बात है, लेकिन अनेकता या विविधता की स्थिति में दृढ़ एकता होना विशेष बात है। ऐसी विशेषता दुनिया के किसी भी अन्य देश में दुर्लभ है। अनेकता में एकता से मुग्ध होकर पं. नेहरू ने अपनी पुस्तक में लिखा है, “There is unity amidst diversity in India.”

हम अनेक तरह के हैं। हममें से कोई गोरा, कोई काला, कोई पंडित, कोई मुल्ला, कोई ईसाई, कोई सिक्ख, कोई असमी, कोई गुजराती, कोई शहरी, कोई देहाती और कोई आदिवासी है। लेकिन जब हमारे सामने भारत की बात आती है, तो हम सभी भारतवासी हैं। उस समय हम जाति, धर्म, संप्रदाय या क्षेत्र आदि किसी तत्व से प्रभावित नहीं होते।

भारत की अनेकता में निहित एकता से हमें यह संदेश मिलता है कि हम न हिंदू हैं, न मुसलमान, न सिक्ख, न ईसाई, बल्कि एक इंसान हैं और भारत में जन्म लेने के कारण मात्र भारतीय हैं I लेकिन दुख यह है कि कालांतर में आपसी फूट और स्वार्थपरता के कारण को पंच कोर्षों के रूप में विभाजित किया है। ये पंच को इस प्रकार है– अन् प्राण, मन, विज्ञान और आनंदमय कोष

इन कोषों में प्रथम शरीर, द्वितीय प्राण तथा तृतीय मन को स्कूल माना जाता है। प्राण को संयत करने के लिए श्रम अर्थात कर्मयोग और मन को नियंत्रित करने के लिए राजयोग की विधि बताई गई है, जो अभ्यास पर निर्भर करती है। मनीषियों ने अभ्यास को ही एकमात्र साधन नहीं माना है। अभ्यास के साथ ही वैराग्य भी आवश्यक है। चित्त की स्थिरता अभ्यास और वैराग्य पर आखित है, तभी बुद्धि निर्मल होती है। उसी समय परम सत्य का साक्षात्कार होता है।

परंपरागत भारतीय विश्वासों के अनुसार मनुष्य देव तथा पितृ ऋण लेकर संसार में आता है। अधिकांश लोगों की धारणा है कि इन ऋणों को चुकाए बिना मनुष्य साधना का अधिकारी नहीं हो सकता। भारतीय मनीषियों ने इन ऋणों को चुकाने का भी उपाय बताया है। उपाय यह है कि मनुष्य इन ऋणों को ऋणों के रूप में ही ग्रहण करे और अपने पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ाए। जल बरसाने वाला मेघ, अन्न उपजाने वाली पृथ्वी और प्रकाश देने वाला सूर्य हमें अनायास प्राप्त हो गए हैं। इन्हें देवता माना गया है। इनके ऋण से मुक्त होने के लिए हमारे पास जो कुछ है, उसे लोगों में बांटकर ही ग्रहण करना चाहिए।

ऋषियों के ऋण से उऋण होने के लिए आवश्यक है कि हम ज्ञान की धारा की रक्षा करें और उसे आगे बढ़ाएं। भारतीय संस्कृति में कर्तव्य, संयम, वैराग्य आदि पर विशेष बल दिया गया है। हमारे पतन का केवल एक ही कारण दृष्टिगोचर होता है-अपने उच्च आदर्शों की विस्मृति। भारतीय संस्कृति व्यक्ति को व्यक्तित्व देकर उसे महान कार्यों की प्रेरणा देती है और इन्हीं कार्यों के द्वारा हम अपनी संस्कृति की धारा को अक्षुण्ण बनाए रख सकते हैं।

600-700 Words Essay speech on Fundamentals of National Integration in Hindi

राष्ट्रीय एकता पर अनमोल विचार- National Integration Quotes in Hindi

# एकता के बिना जनशक्ति शक्ति नहीं है जबतक उसे ठीक तरह से सामंजस्य में ना लाया जाए और एकजुट ना किया जाए, और तब यह आध्यात्मिक शक्ति बन जाती है । – Sardar Vallabhbhai Patel.

# एकता से हमारा अस्तित्व कायम रहता है, विभाजन से हमारा पतन होता है। – जॉन डिकिन्सन.

# अकेले हम कितना कम हासिल कर सकते हैं, साथ में कितना ज्यादा। – Helen Keller.

# जो परस्पर भेद-भाव रखते है, वे कभी धर्म का आचरण नहीं करते. वे सुख भी नहीं पाते. उन्हे गौरव नहीं प्राप्त होता तथा उन्हें शान्ति की भाषा भी नहीं सुहाती। – महर्षि वेदव्यास.

# जलती हुई लकड़ियाँ अलग-अलग होने पर धुआँ फेंकती हैं और एक साथ होने पर प्रज्वलित हो उठता है. इसी प्रकार जाति-बन्धु भी आपस में फूट होने पर दुखी रहते हैं और एकता होने पर सुखी रहते हैं। -महर्षि वेदव्यास.

# तोड़ना नहीं है, टूटे हुए को जोड़ना है

# स्थायी एकता वहीं उत्पन्न होती हैं जहाँ अंतःकरण एक होते हैं.

# भेद और विरोध ऊपरी हैं. भीतर मनुष्य एक है. इस एक को दृढ़ता के साथ पहचानने का प्रयत्न कीजिए. जो लोग भेद-भाव को पकड़कर ही अपना रास्ता निकालना चाहते हैं, वे गलती करते हैं. विरोध रहे तो उन्हें आगे भी बने ही रहना चाहिए, यह कोई काम की बात नही हुई. हमें नयें सिरे से सब कुछ गढ़ना है, तोड़ना नहीं है। टूटे को जोड़ना है। -हजारीप्रसाद द्विवेदी.

# पाँचों उँगलियों के संयोग से हाथ काम करता है. उसमें से एक भी छूट जाए अथवा असहयोग कर बैठे तो उसका सौंदर्य नष्ट हो जाता है. एक भी स्वजन के अलग हो जाने से लोगों की व्यावहारिक शक्ति नष्ट हो जाती है. अतः लोगो को सब कुछ त्याग कर भी ऐकमत्य की रक्षा कर लेना आवश्यक है। -वेमना.

# एकता में शक्ति हैI

# जहां एकता है वहां हमेशा जीत होती हैI

# राष्ट्रीय एकता पर अनमोल विचार- National Integration Quotes in Hindi

एकता – मूलमंत्र हैं यह विकास का, देश के सौंदर्य और उद्दार का I

हर एक शब्द भारी हैं, जब एकता में देश की हर कौम सारी हैंI

एकता ही देश का बल हैं, एकता में ही सुनहरा पल हैंI

जब तक रहेगी साठ गाठ, होता रहेगा देश का विकासI

याद रखो एकता का मान, तब ही होगी देश आनI

एकता में ही संबल हैं जिस देश में नही वो दुर्बल हैंI

राष्ट्रीय एकता पर अनमोल विचार- National Integration Quotes in Hindi

# एकता ताकत है, विभाजन कमजोरी हैI

# एकता के साथ हर नामुमकिन काम मुमकिन हो जाता हैI

# एकता के बिना, देश आपदा का सामना करेगाI

# अनेकता में एकता यही भारत की विशेषताI

# राष्ट्रीय एकता पर अनमोल विचार- National Integration Quotes in Hindi

राष्ट्रीय एकता का अर्थ क्या है?

राष्ट्रीय एकता का अर्थ है -भारत की अनेकता में निहित एकता से हमें यह संदेश मिलता है कि हम न हिंदू हैं, न मुसलमान, न सिक्ख, न ईसाई, बल्कि एक इंसान हैं और भारत में जन्म लेने के कारण मात्र भारतीय हैं I

राष्ट्रीय एकता दिवस कब से शुरू हुआ?

राष्ट्रीय एकता दिवस प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर को भारत में मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत भारत सरकार द्वारा सन् 2014 में की गई थी।

भारत में राष्ट्रीय दिवस कब मनाया जाता है?

राष्ट्रीय एकता दिवस प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर को भारत में मनाया जाता है।

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नमस्कार , मेरा नाम अंजू वर्मा है | मै उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव से हूँ | मै हिंदी भाषा में पोस्ट ग्रेजुएट हूँ| हिंदी साहित्य में मेरा जुड़ाव बचपन से ही रहा है इसीलिए मैंने परास्नातक के लिये हिंदी को ही एक विषय के रूप में चुना |अंग्रेजी के इस दौर में जहाँ हिंदी एक स्लोगन बनता जा रहा है जबकि जनसँख्या का एक बड़ा हिस्सा हिंदी भाषी है |लेकिन हम अंग्रेजी बोंलने को एक हाई सोसाइटी से जुड़ाव का माध्यम मानने लगे हैं | मुझे कुकिंग, घूमने एवम लिखने का शौक है मै ज्यादातर हिंदी भाषा , मोटिवेशनल कहानी, और फेमस लोगों के बारे में लिखती हूँ |

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