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डॉ अब्दुल कलाम  पर  600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण । 600-700 Words Essay speech on Dr Abdul Kalaam in Hindi

डॉ अब्दुल कलाम  पर  600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण – 600-700 Words Essay speech on Dr Abdul Kalaam in Hindi

डॉ अब्दुल कलाम  से जुड़े छोटे निबंध जैसे डॉ अब्दुल कलाम  पर  600-700 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11,और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  600-700 Words Essay speech on Dr Abdul Kalaam in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

600-700 Words Essay speech on Dr Abdul Kalaam

600-700 Words Essay speech on Dr Abdul Kalaam in Hindi for Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

भारतीय प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रम के जनक और विश्वविख्यात वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। इनके लिए भारत एक भूखंड नहीं, बल्कि जीवंत आस्था है, जिसके प्रति उनका समर्पण अनुकरणीय है। वे विश्व बंधुत्व में विश्वास रखते हैं। उनका पूरा जीवन एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत बनाने के लिए समर्पित है। इस कल्पना को साकार करने के लिए डॉ. अब्दुल कलाम ने भारत को विशिष्ट अंतरिक्ष क्लब और प्रक्षेपास्त्र रखने वाले देशों के संघ का सदस्य बना दिया है। वे विकासशील भारत को एक पूर्ण विकसित देश बनाना चाहते हैं।

डॉ. अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को तमिलनाडु की तीर्थनगरी रामेश्वरम में नाव बनाने वाले एक साधारण परिवार में हुआ था। इनको ‘मिसाइल मैन’ के नाम से भी जाना जाता है। इनके पिता का नाम ए.पी. अंबालम जमालुद्दीन जैनुलाब्दीन मटैकायर तथा इनकी माता का नाम आशियम्मा है। ये अपने चार भाइयों तथा तीन बहनों में सबसे छोटे हैं और मछुआरा परिवार में जन्मे शाकाहारी व्यक्ति हैं।

जिस उम्र में बच्चों को खेल-कूद से लगाव होता है, उस आयु में वे अखबार बेचकर अपने परिवार की आर्थिक सहायता करते थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रामनाथपुरम के एक मिशनरी स्कूल में प्राप्त की थी। इसके पश्चात उन्होंने सर्क्यूवार्ट्स स्कूल, रामेश्वरम में शिक्षा प्राप्त की। इन्होंने विज्ञान स्नातक की उपाधि तिरुचिरापल्ली के सेंट कॉलेज से ली। तत्पश्चात मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान से डॉ. कलाम ने एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता प्राप्त की और सन 1958 में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.) से अपना कैरियर आरंभ किया। वे आजीवन अविवाहित रहते हुए देश सेवा में लगे रहे।

डॉ. कलाम देश के शीर्षस्थ वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी संस्थानों से जुड़े रहे। सन 1963 में वे भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में आ गए और एस.एल.वी.-3 के परियोजना निदेशक बन गए। यहाँ रहकर उन्होंने भारतके स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान की रूपरेखा, विकास और प्रबंधन पर काम किया, जिसने बाद में पृथ्वी के निकट कक्षा में रोहिणी उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। सन 1982 में डॉ. कलाम पुन: डी. आर. डी. ओ. में वापस आ गए। उनके मन में पहले से बसी स्वदेशी प्रक्षेपास्त्रों के विकास हेतु एकीकृत प्रक्षेपास्त्र विकास परियोजना को मूर्तरूप देने का अवसर आ गया था। उन्होंने जुलाई, 1992 से दिसंबर, 1999 तक रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार तथा रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव का पदभार संभाला। इसके बाद वे भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार पद पर कार्यरत रहे।

डॉ. कलाम ने 28 वर्ष पूर्व 18 जुलाई, 1980 को एस.एल.वी.-3 को श्री हरिकोटा से सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया था। सन 1998 में पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षण में भी इनका बहुत योगदान रहा। इनकी उपलब्धियों के फलस्वरूप इन्हें सन 1983 में ‘पद्म भूषण’ तथा 1990 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया। इसके पश्चात इन्हें सन 1997 में भारत के सर्वोच्च पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।

डॉ. कलाम धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। वे अजमेर शरीफ की दरगाह में प्रार्थना करने के अतिरिक्त ‘गीता’ पढ़कर उनके उपदेशों को भी ग्रहण करते हैं। ये दिन में दो बार प्रार्थना करते हैं। इन्हें शास्त्रीय संगीत में गहरी रुचि है और तमिल के प्रति गहरा स्नेह। ये कवि भी हैं। उन्होंने ‘इंडिया-2020’ और ‘विंग्स ऑफ फायर-एन ऑटोबायोग्राफी’ सहित कई पुस्तकें भी लिखी हैं।

डॉ. कलाम को बच्चों से बहुत प्यार है। वे अपने छात्रों की बहुत चिंता करते थे और आज भी करते हैं। 15 जुलाई, 2002 को उन्हें भारत का राष्ट्रपति चुना गया। वे देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाले पहले गैर राजनीतिक व्यक्ति थे। उनकी प्रतिभा और बुद्धिमत्ता से सभी लोग प्रेरणा लेते रहेंगे।

7 जुलाई 2015 को आईआईएम शिलांग में एक कार्यक्रम में अचानक कार्डियेक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई थी. उनके एक सहयोगी ने बताया कि उनके आखिरी शब्द थे ‘फनी गाएज, आर यू डूइंग वैल?’ संबोधन के दौरान उन्होंने न सिर्फ मानवता को लेकर चिंता जाहिर की थी बल्कि धरती पर फैले प्रदूषण को लेकर भी चिंता जताई थी. पूर्व राष्ट्रपति कलाम एक परमाणु वैज्ञानिक, शानदार लेखक, कवि और शिक्षाविद थे. 27 जुलाई 2015 को 83 साल की उम्र में निधन होने तक देश की सेवा की थीI

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अब्दुल कलाम ने कौन सी मिसाइल बनाई थी?

उन्होने भारतीय टेक्नॉलजी का इस्तेमाल कर अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइल बनाई. सन 1992 से 1999 तक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार भी रहेI

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम भारत के कितने राष्ट्रपति थे?

A P J Abdul Kalam जो मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति नाम से भी जाने जाते थे, भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने कितनी मिसाइल बनाई थी?

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने अग्नि, आकाश, नाग, पृथ्वी त्रिशूल नाम की पांच विशेष मिसाइल विकसित की थी I

डॉ कलाम ने 1988 में कौन सा प्रक्षेपास्त्र विकसित किया?

डॉ कलाम ने 1988 में नाग प्रक्षेपास्त्र विकसित किया था I

मै आशा करती हूँ कि  डॉ अब्दुल कलाम  पर लिखा यह निबंध ( डॉ अब्दुल कलाम  पर  600-700 शब्दों में  निबंध,भाषण । 600-700 Words Essay speech on Dr Abdul Kalaam in Hindi ) आपको पसंद आया होगा I साथ ही साथ आप यह निबंध/लेख अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ जरूर साझा ( Share) करेंगें I

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संघ लोक सेवा आयोग का एग्जाम कैलेंडर {Exam Calendar Of -UNION PUBLIC COMMISSION (UPSC) लिंक/Link

नमस्कार , मेरा नाम अंजू वर्मा है | मै उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव से हूँ | मै हिंदी भाषा में पोस्ट ग्रेजुएट हूँ| हिंदी साहित्य में मेरा जुड़ाव बचपन से ही रहा है इसीलिए मैंने परास्नातक के लिये हिंदी को ही एक विषय के रूप में चुना |अंग्रेजी के इस दौर में जहाँ हिंदी एक स्लोगन बनता जा रहा है जबकि जनसँख्या का एक बड़ा हिस्सा हिंदी भाषी है |लेकिन हम अंग्रेजी बोंलने को एक हाई सोसाइटी से जुड़ाव का माध्यम मानने लगे हैं | मुझे कुकिंग, घूमने एवम लिखने का शौक है मै ज्यादातर हिंदी भाषा , मोटिवेशनल कहानी, और फेमस लोगों के बारे में लिखती हूँ |

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