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परोपकार पर  600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण । 600-700 Words Essay speech on Charity in Hindi

परोपकार पर  600-700 शब्दों में  निबंध, भाषण । 600-700 Words Essay speech on Charity in Hindi

परोपकार से जुड़े छोटे निबंध जैसे परोपकार पर  600-700 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  600-700 Words Essay speech on Charity in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

600-700 Words Essay Speech on Charity in Hindi for Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

‘परोपकार’ दो शब्दों के योग से बना है-पर और उपकार। ‘पर’ का अर्थ है-दूसरे की और ‘उपकार’ का अर्थ है-भलाई। अर्थात दूसरों की भलाई करना ही परोपकार है, लेकिन दूसरों की भलाई करते समय निःस्वार्थ भाव होना चाहिए। निःस्वार्थ भाव से किए गए दूसरों के प्रति उपकार को ही ‘परोपकार’ कहा जाता है। परोपकारी वही है, जिसका हृदय दीन-दुखियों की पुकार सुनकर द्रवित हो जाता है और जो भूखे व्यक्ति को देखकर अपने भोजन की थाली उसकी ओर बढ़ा देता है। इसके विपरीत जो इस संसार में सिर्फ अपने लिए जीता है, वह मनुष्य नहीं, अपितु पशु और दानव है।

संपूर्ण प्रकृति परोपकार पर ही आधारित है। सूर्य हमें प्रकाश देता है और बदले में कुछ नहीं मांगता। चांद हमें शीतल चांदनी देता है और बदले में कुछ नहीं मांगता। पृथ्वी माता के समान हमारा पालन-पोषण करती है और बदले में कुछ नहीं मांगती। इसी प्रकार वृक्ष जग को मीठे फल खिलाता है और नदियां शीतल जल प्रदान करती हैं, लेकिन वे बदले में हमसे कुछ नहीं मांगते। दूसरे शब्दों में मानव जीवन की सार्थकता केवल इसी में है कि वह परोपकार के लिए जिए। इस विषय में कविवर रहीम कहते हैं

वृक्ष कबहुं नहीं फल भखै, नदी न संचै नीर। परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर ॥ परोपकार की बलिवेदी पर सर्वस्व न्योछावर कर देना ही भारतीय संस्कृति रही है। इस संबंध में महर्षि दधीचि और राजा शिवि की कहानी उल्लेखनीय है । महर्षि दधीचि ने देवताओं के कल्याण के लिए अपनी हड्डियां तक दान में दे दी थीं, जबकि राजा शिवि ने एक कबूतर की जान बचाने के लिए अपना संपूर्ण अंग काटकर दान कर दिया था। महात्मा बुद्ध एक राजा के पुत्र थे, फिर भी लोगों के दुख निवारण हेतु उन्होंने राजवैभव त्यागकर जंगल की राह ली। जन कल्याण हेतु महात्मा गांधी ने बैरिस्टर का चोगा उतारकर लंगोटी पहन ली।

जिन राष्ट्रभक्तों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं की, उन्हें आप क्या कहेंगे? उन्होंने ऐसा क्यों किया? प्रतिष्ठा के लिए अपने सुख के लिए? नहीं, उनमें मात्र एक ही भावना थी कि देश के लोग खुली हवा में सांस लें और आने वाली पीढ़ी दमघोंटू वातावरण में न जन्मे। एक फो सीमा पर अपनी जान इसीलिए झोंकता है (यह जानते हुए भी कि उसके मरने के बाद उसकी कमी उसके परिवार के लोगों को उम्र भर झेलनी पड़ेगी), ताकि उसके देशवासी गुलाम न हों, वे सिर उठाकर जी सकें।

अतएव प्रत्येक मनुष्य को चाहिए कि अगर वह धनी है, तो निर्धनों की सहायता करे। यदि वह शक्तिमान है, तो अशक्तों को अवलंबन दे। यदि वह ज्ञानी है, तो अज्ञानियों को ज्ञान दे। विद्यार्थियों को तो प्रारंभ से ही परोपकार का पाठ पढ़ाना चाहिए। पठन-पाठन से समय निकालकर उन्हें गरीब की झोपड़ियों में जाकर कराहते लाचार लोगों की सेवा करनी चाहिए। उन्हें टोली बनाकर महामारी एवं अन्य आपदाओं में फंसे लोगों की सहायता करनी चाहिए। इसी परोपकार के संबंध में गोस्वामी तुलसीदास ने ‘रामायण’ में लिखा है।

परहित सरिस धरम नहीं भाई । पर पीड़ा सम नहीं अधमाई ॥

गोस्वामी तुलसीदास
600-700 Words Essay speech on Charity

परोपकार पर अनमोल वचन – Quotes on Charity in Hindi

जिस हरे-भरे वृक्ष की छाया का आश्रय लेकर रहा जाए, पहले उपकारों का ध्यान रखकर उसके एक पत्ते से भी द्रोह नहीं करना चाहिए। महाभारत

समाज के हित में अपना हित है । श्रीराम शर्मा , आचार्य

परहित सरिस धरम नहीं भाई । पर पीड़ा सम नहीं अधमाई ॥ -गोस्वामी तुलसीदास

परोपकार पर अनमोल वचन – Quotes on Charity in Hindi

सादगी से बढ़कर कोई श्रृंगार नहीं होता दूसरों की सेवा से बढ़कर कोई परोपकार नहीं होता।

इंसानियत का धर्म सदा निभाओ परोपकार का भाव दिल में लाओ।

मानवता का यही है सार दिल बड़ा जो करे उपकार।

मानुष जीवन पाकर मन में सदा रखो अनमोल धन परोपकार से ही बनता है सुंदर सुखमय सफल जीवन।

आज और अभी जीवन की नई परिभाषा सीखो वृक्ष, नदी और बादल से परोपकार की भाषा सीखो।

ईर्ष्या, लोभ, मोह , क्रोध का सदा जीवन में त्याग हो तर जाता है मानव जीवन जब निस्वार्थ परोपकार का भाव हो

परोपकार पर अनमोल वचन – Quotes on Charity in Hindi

FAQ

परोपकार शब्द का क्या अर्थ हैं?

‘परोपकार’ दो शब्दों के योग से बना है-पर और उपकार। ‘पर’ का अर्थ है-दूसरे की और ‘उपकार’ का अर्थ है-भलाई। अर्थात दूसरों की भलाई करना ही परोपकार है, लेकिन दूसरों की भलाई करते समय निःस्वार्थ भाव होना चाहिए।

परोपकार का पर्यायवाची शब्द क्या है?

हित, भलाई, उपकार, कल्याण, दान, परकल्याण, परहित आदि परोपकार के पर्यायवाची शब्द हैI

परोपकार कौन सी संधि है?

परोपकार शब्द (पर+उपकार) में गुण संधि है I

परोपकार का विलोम क्या होगा?

परोपकार का विलोम अपकार होगाI

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