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टीवी और विद्यार्थी  पर  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण । 200-300 Words Essay speech on TV and Students in Hindi

टीवी और विद्यार्थी  पर  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण – 200-300 Words Essay speech on TV and Students in Hindi

टीवी और विद्यार्थी से जुड़े छोटे निबंध जैसे टीवी और विद्यार्थी पर  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11,और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  200-300 Words Essay speech on TV and Students in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

200-300 Words Essay, speech on TV and Students in Hindi for Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

वर्तमान युग में विज्ञान के महत्त्वपूर्ण आविष्कारों में से एक है केबल टीवी. जिसने सबसे अधिक बालक व युवा वर्ग को प्रभावित किया है। इनमें एक साथ 100 से अधिक चैनलों पर विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कार्यक्रम चौबीसों घंटे दिखाए जाते हैं।

इनमें कार्टून चैनल से लेकर फिल्मी चैनल, नाटक, संगीत, वन्य जीवन, पर्यावरण तथा समाचार चैनल तक शामिल हैं। परिवार का हर सदस्य, अपनी रुचि के अनुसार, अपने चैनल का मनपसंद कार्यक्रम रोजाना देखना चाहता है। बच्चों का तो यह मनपसंद मनोरंजन का साधन है।

ऐसे में एक प्रसिद्ध उक्ति सत्य सिद्ध होती है एक अनार और सौ बीमार विद्यालय के समय के बाद बच्चे घर आते ही टीवी चालू कर उसके सामने आंखें गड़ाए बैठे रहते हैं। कुछेक तो सुबह उठकर भी टीवी देखकर ही स्कूल जाते हैं, तो कुछ बच्चे घरों में देर रात्रि तक टीवी के सामने जमे रहते हैं।

बिना किसी मकसद के समय काटने के लिए ऐसा करना एक बुरी लत है। इससे समय तो बर्बाद होता ही है, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। कभी-कभी अभिभावक बच्चों को टीवी कार्यक्रमों में व्यस्त रखकर कुछ समय के लिए निश्चित तो अवश्य हो जाते हैं, परंतु वे यह भूल जाते हैं कि उसमें आने वाले कार्यक्रम बच्चे के अपरिपक्व व संवेदनशील मन पर क्या प्रभाव छोड़ रहे हैं।

ऐसे में माता-पिता को बाल मनोविज्ञान की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। इस संदर्भ में पंचतंत्र में अत्यंत स्पष्ट संकेत किया गया है। वहां पंडित विष्णु गुप्त ने कहा कि बच्चों का मन कच्चे घड़े की तरह अत्यंत संवेदनशील होता है। उस पर कब ‘संस्कार’ अपना प्रभाव डालते हैं, पता नहीं चलता।

उसका ज्ञान तो तब होता है, जब वह समय आने पर उभरकर साफ-साफ दिखाई देने लगता है। इसलिए क्या देखना है, क्यों देखना है, इस बारे में माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को समझाएं तथा प्रयास करें कि बच्चे उनकी उपस्थिति में ही कार्यक्रम देखें।

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200-300 Words Essay speech on TV and Students in English

200-300 Words Essay speech on TV and Students

One of the important inventions of science in the present era is cable TV. Which has affected the boys and youth the most. In these, programs related to different fields are shown round the clock on more than 100 channels simultaneously.

These range from cartoon channels to film channels, drama, music, wildlife, environment, and news channels. Every member of the family, as per their interest, wants to watch the favorite program of their channel daily. It is the favorite means of entertainment for children.

In such a situation, a famous saying proves to be true, after one pomegranate and a hundred sick school time, children turn on the TV as soon as they come home and sit blindly in front of it. Some even wake up in the morning and go to school after watching TV, while some children stay in their homes till late at night in front of the TV.

It is a bad habit to do this to waste time without any motive. This not only wastes time but also has a bad effect on physical and mental health. Sometimes parents are sure for some time by keeping the children busy in TV programs, but they forget that what effect the programs coming in it are leaving on the immature and sensitive mind of the child.

In such a situation, parents should not ignore child psychology. A very clear indication has been made in this context in the Panchatantra. There Pandit Vishnu Gupta said that the mind of children is very sensitive like a raw pot. It is not known when the ‘sanskars’ exert their influence on him.

Its knowledge comes only when it emerges clearly when the time comes. Therefore, parents should explain to the children about what to watch, why to watch and try that the children should watch the program in their presence only.


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नमस्कार , मेरा नाम अंजू वर्मा है | मै उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव से हूँ | मै हिंदी भाषा में पोस्ट ग्रेजुएट हूँ| हिंदी साहित्य में मेरा जुड़ाव बचपन से ही रहा है इसीलिए मैंने परास्नातक के लिये हिंदी को ही एक विषय के रूप में चुना |अंग्रेजी के इस दौर में जहाँ हिंदी एक स्लोगन बनता जा रहा है जबकि जनसँख्या का एक बड़ा हिस्सा हिंदी भाषी है |लेकिन हम अंग्रेजी बोंलने को एक हाई सोसाइटी से जुड़ाव का माध्यम मानने लगे हैं | मुझे कुकिंग, घूमने एवम लिखने का शौक है मै ज्यादातर हिंदी भाषा , मोटिवेशनल कहानी, और फेमस लोगों के बारे में लिखती हूँ |

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