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चाय  पर  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण । 200-300 Words Essay speech on Tea in Hindi

चाय  पर  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण – 200-300 Words Essay speech on Tea in Hindi

चाय से जुड़े छोटे निबंध जैसे चाय  पर  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11,और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  200-300 Words Essay speech on Tea in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

200-300 Words Essay, speech on Tea in Hindi for Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

सन् 1950 तक भारत में चाय का प्रचलन था. परंतु इतना नहीं, जितना कि आज है। आज तो बात-बात पर चाय पीने पर कहावत तक बन गई है कि ‘चाय पीने और झूठ बोलने का कोई समय नहीं होता।’ और अब तो यह उन गांवों को भी आवश्यकता बन गई है, जो कभी इसके नाम पर नाक मुंह सिकोड़ा करते थे, जहां दूध-लस्सी ही पेय के रूप में मान्य थे।

जापानियों के बाद चाय पीने वालों की संख्या तिब्बतियों में अधिक पाई जाती है। भारत में आने पर कप प्लेट में उड़ेलकर चाय पीना भले ही आ तिब्बती सीख गए हैं, लेकिन इनके पारंपरिक ढंग की अपनी विशेषता है।

तिब्बती दिनभर और खाने के साथ चाय के कई प्याले पीते हैं। चाय में मक्खन और नमक डालते हैं। इनकी यह चाय खूब गाढ़ी होती है। इसमें स घुलता है। भारत में शरण लेने से पूर्व, तिब्बत में अमीर-गरीब, छोटे-बड़े सब अपने-अपने चाय के प्याले साथ लिए घूमते थे जिस किसी तिब्बती के घर पर, चाहे किसी भी समय अतिथि पहुंचता था, तो चाय का समाचार आ पहुंचता था। अपनी जेब से अतिथि ने लकड़ी का बना हुआ प्याला निकाला, उसमें चाय डाली गई। चाय पीकर, जीभ से चाट-पोंछकर, प्याला फिर अपने निर्दिष्ट स्थान पर रख दिया जाता था।

वर्ष पचास से पहले तिब्बत के बाद चाय पीने-पिलाने में इंग्लैंड का नंबर था। वहां सब बातें बाकायदा और किसी न किसी विशेष उद्देश्य से की जाती हैं। इंग्लैंड में चाय निश्चित समय पर पी जाती है। चाय के साथ समयानुकूल रोटी, सैंडविच, टोस्ट, मिठाइयां व केक खाए जाते हैं। चाय पीते समय समाज, राजनीति, धर्म, साहित्य और शिल्पकला इत्यादि। विविध विषयों के साथ एक पंथ सौ काज होते हैं महानगरों में ऐसे कई चाय या कॉफी बार हैं। अब तो घरों में और प्राइवेट पार्टियों में चाय के बाद डांस भी होने लगा है अर्थात् टी-पार्टी।

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200-300 Words Essay speech on Tea in English

200-300 Words Essay speech on Tea

Tea was prevalent in India till 1950. But not so much as it is today. Today, even after drinking tea, it has become a proverb that ‘there is no time to drink tea and lie.’ And now it has become a necessity even in those villages, which once frowned on its name, where milk and lassi were accepted as a drink.

After the Japanese, the number of tea drinkers is found more in Tibetans. On coming to India, Tibetans may have learned to drink tea by pouring it in a cup plate, but their traditional way has its own specialty.

Tibetans drink several cups of tea throughout the day and with meals. Add butter and salt to the tea. Their tea is very thick. It dissolves in it. Before taking refuge in India, Tibet, rich and poor, small and big, used to walk around with their respective cups of tea, and news of tea would arrive at any Tibetan’s house, at any time when the guest arrived. From his pocket the guest took out a cup made of wood, tea was poured into it. After drinking the tea, licking and wiping it with the tongue, the cup was then placed in its designated place.

Before the year fifty, England was the number one drinking tea after Tibet. There everything is done in a systematic way and for some specific purpose. In England, tea is drunk at certain times. Timely bread, sandwiches, toast, sweets, and cakes are eaten with tea. Society, politics, religion, literature and craftsmanship, etc. while drinking tea. There is a cult hundred kaj with diverse themes. There are many such tea or coffee bars in the metropolis. Now dance has started taking place after tea in homes and in private parties i.e. tea party.


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