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गुरू पूर्णिमा पर 200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण । 200-300 Words Essay speech on Guru Purnima in Hindi

गुरू पूर्णिमा पर 200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण – 200-300 Words Essay speech on Guru Purnima in Hindi

गुरू पूर्णिमा से जुड़े छोटे निबंध जैसे गुरू पूर्णिमा पर  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11,और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  200-300 Words Essay speech on Guru Purnima in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

200-300 Words Essay, speech on Guru Purnima in Hindi for Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरू पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरू पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरंभ में आती है। इस दिन से चार महीने तक साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ होते हैं-न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। अध्ययन के लिए भी ये उपयुक्त माने गए हैं।

जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है. ऐसे ही गुरुचरणों में उपस्थित जिज्ञासु-साधकों को ज्ञान, शांति भक्ति और योग शक्ति . प्राप्त करने की योग्यता प्राप्त होती है। प्राचीन समय में जब शिक्षा गुरुकुलों और ऋषिकुलों में दी जाती थी, शिक्षा के नए सत्र का प्रारंभ इसी दिन से हुआ करता था।

यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है। वे श्रीविष्णु का अवतार थे। उन्होंने चारों वेदों को व्यवस्थित किया था। इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें ‘आदिगुरु’ कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को ‘व्यास पूर्णिमा’ नाम से भी जाना जाता है। विद्वानों और संत-महात्माओं में व्यासपीठ का इसीलिए विशेष महत्त्व है। भक्तिकाल के संत घीसादास, जो संत कबीर के शिष्यों में से एक थे, जन्म इसी दिन हुआ था।

शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है-अंधकार या मूल अज्ञान और रु का अर्थ है-उसका निवारण करने वाला गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह अज्ञान (तिमिर) का ज्ञान से निवारण कर देता है, अर्थात् अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को ‘गुरु’ कहा जाता है।

गुरु के माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा गया है कि ईश्वर और गुरु एक साथ यदि सामने खड़े हो जाएं, तो पहले नमस्कार गुरु को करना चाहिए। क्योंकि उन्होंने ईश्वर के बारे में ज्ञान दिया है और उन्हीं की कृपा से ईश्वर के दर्शन हुए हैं।

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200-300 Words Essay speech on Guru Purnima in English

200-300 Words Essay speech on Guru Purnima

The full moon of Ashadh month is called Guru Purnima. There is a law of Guru worship on this day. Guru Purnima comes at the beginning of the rainy season. From this day, for four months, sages and saints stay at the same place and shed the Ganges of knowledge. These four months are the best in terms of weather – neither too hot nor too cold. They are also considered suitable for study.

As the land is heated by the heat of the sun gets coolness from the rain and the power to produce crops. In the same way, knowledge, peace, devotion, and yoga power to the seekers present at the Guru’s feet. ability to obtain. In ancient times, when education was given in Gurukulas and Rishikulas, the new session of education used to start from this day.

This day is also the birthday of Krishna Dvaipayana Vyasa, the author of Mahabharata. He was an incarnation of Shri Vishnu. He had organized the four Vedas. For this reason, one of his names is also Ved Vyas. He is called ‘Adiguru’ and Guru Purnima is also known as ‘Vyas Purnima’ in his honor. That is why Vyaspeeth has special importance among scholars and saints. Bhaktikal saint Ghisadas, who was one of the disciples of Sant Kabir, was born on this day.

The meaning of Gu has been told in the scriptures – the guru who removes the darkness of original ignorance and Ru means – is called guru because he removes ignorance (blackness) with knowledge, that is, removes darkness and gives light to light. The one who leads you is called ‘Guru’.

Describing the greatness of the Guru, it has been said that if God and the Guru stand in front together, then the first Namaskar should be done to the Guru. Because he has given knowledge about God and by his grace God has appeared.

गुरु पूर्णिमा को क्या उपाय करें?

गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरु से प्रार्थना करनी चाहिये कि वे हमेशा हमारी अज्ञानता और अहंकार को दूर करें I भाग्योदय न होने की स्थिति में जरूरतमंद को पीला अनाज , पीला कपडा और पीली मिठाई बाटनी चाहिये I
ज्ञान की वृद्धि के लिए इन मंत्रों का जाप करना चाहिए.
ॐ गुं गुरवे नम:।
ॐ बृं बृहस्पतये नम:।

गुरु पूर्णिमा क्या महत्व है?

गुरु अपने शिष्यों को गलत मार्ग पर चलने से रोकता है और सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता है। गुरुओं के सम्मान में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है।

गुरु पूर्णिमा का क्या मतलब है?

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। जिस प्रकार सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है।

गुरु पूर्णिमा के दिन क्या खाना चाहिए?

गुरु पूर्णिमा के दिन सायं में तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाना चाहिएI इस दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिएI मांस मदिरा आदि जैसे तामसिक प्रवृति वाले भोजन का भूलकर भी उपयोग नहीं करना चाहिएI

गुरु पूर्णिमा के दिन क्या दान करें?

1-मेष राशि मंगल के स्वामित्व वाली इस राशि के जातकों के लिए इस पूर्णिमा के दिन गुड़ का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।
2. वृषभ राशि शुक्र के स्वामित्व वाली इस राशि के जातकों के लिए इस पूर्णिमा के दिन मिश्री का दान शुभ माना गया है।
3. मिथुन राशि बुध के स्वामित्व वाली इस राशि के जातकों को इस पूर्णिमा के दिन हरी मूंग की दाल का दान करना चाहिए।
4. कर्क राशि चंद्र के स्वामित्व वाली इस राशि के जातकों को इस पूर्णिमा के दिन चावल का दान करना शुभ माना जाता है।
5. सिंह राशि सूर्य के स्वामित्व वाली इस राशि के जातकों को इस पूर्णिमा के दिन गेहूं का दान करना चाहिए।
6. कन्या राशि कन्या राशि वालों को इस दिन जानवरों खासकर गाय को हरा चारा खिलाना चाहिए। इस राशि के स्वामी भी बुध ही हैं।
7. तुला राशि तुला राशि भी शुक्र के स्वामित्व वाली राशि है,ऐसे में इस पूर्णिमा को इस राशि के जातकों को कन्याओं को खीर का खिलाना शुभ माना गया है।
8. वृश्चिक राशि मंगल के स्वामित्व वाली इस राशि के जातकों को भी इस पूर्णिमा के दिन गुड़ और चना बंदरों को खिलाना चाहिए।
9. धनु राशि बृहस्पति देव के स्वामित्व वाली इस राशि के जातकों को इस पूर्णिमा के दिन मंदिर में चने का दान शुभ माना गया है।
10. मकर राशि शनि के स्वामित्व वाली इस राशि के जातकों को इस पूर्णिमा को कंबल दान करना चाहिए।
11. कुंभ राशि वहीं शनि की ही स्वामित्व वाली दूसरी राशि कुंभ के जातकों के लिए इस दिन काली उड़द दाल दान शुभ माना गया है।
12. मीन राशि देवगुरु बृहस्पति के स्वामित्व वाली इस राशि के लोगों को इस पूर्णिमा पर हल्दी के अलावा बेसन से बनी मिठाई का दान करना चाहिए।

आज पूर्णिमा के दिन क्या करें?

शास्त्रों के अनुसार, इस दिन फल, अनाज, वस्त्र और गुड़ आदि चीजों का दान किया जा सकता हैI शास्त्रों में पूर्णिमा तिथि मां लक्ष्मी को समर्पित मानी जाती हैI
मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी की प्रिय वस्तुओं मिठाई, दूध और नारियल का दान करने से धन की देवी माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैंI

2022 में गुरु पूर्णिमा कब है?

2022 में गुरु पूर्णिमा 13 जुलाई २०२२ को है?


मै आशा करती हूँ कि  गुरू पूर्णिमा पर लिखा यह निबंध ( गुरू पूर्णिमा  पर  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण । 200-300 Words Essay speech on Guru Purnima in Hindi ) आपको पसंद आया होगा I साथ ही साथ आप यह निबंध/लेख अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ जरूर साझा ( Share) करेंगें I

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