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बाल गंगाधर तिलक  200 – 300 शब्दों में  निबंध भाषण । 200-300 Words Essay speech on Bal Gangadhar Tilak in Hindi

 बाल गंगाधर तिलक  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण – 200-300 Words Essay speech on Bal Gangadhar Tilak in Hindi

एक महान देश-भक्त ,राजनेता और समाज को आजादी के बारे में जागरूक कराने वाले के रूप में बाल गंगाधर तिलक सदैव हमारे दिल में रहेंगे I  बाल गंगाधर तिलक से जुड़े छोटे निबंध जैसे  बाल गंगाधर तिलक  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11,और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  200-300 Words Essay, speech on Bal Gangadhar Tilak in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

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बाल गंगाधर तिलक भारत के एक महान नेता तथा राजनीतिज्ञ थे। इनका जन्म 23 जुलाई, 1856 को महाराष्ट्र स्थित रत्नागिरि जिले के गांव चिखली (चिक्कन) में हुआ था। इनकी शिक्षा पूना के दक्खन कॉलेज में हुई थी। इन्होंने वकालत की उपाधि भी प्राप्त की, किंतु इस व्यवसाय में हाथ नहीं डाला। इन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश सेवा के लिए अर्पित कर दिया।

सर्वप्रथम इन्होंने एक स्कूल स्थापित किया और उसमें स्वयं अध्यापक हो गए। इन्होंने ‘केसरी’ और मराठी में ‘मराठा दर्पण’ नामक दो समाचार पत्रों का संपादन किया। इन समाचार पत्रों के माध्यम से इन्होंने लोगों में राष्ट्रीय जागृति पैदा की। देश को स्वतंत्र कराने के लिए इन्होंने अनेक कार्य किए।

ब्रिटिश सरकार ने समझा कि ये लोगों को हिंसात्मक कार्यों के लिए उकसाते हैं, इसलिए उन्हें छह वर्ष के लिए वर्मा प्रदेश के मांडले नगर में निर्वासित कर दिया गया। जेल में रहकर इन्होंने हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता पर टीका लिखी-कर्मयोग रहस्य विद्वानों ने इसकी अत्यधिक प्रशंसा की। इसे पढ़कर लगता है कि इनकी हिंदू धर्म ग्रंथों पर कितनी गहरी पकड़ थी।

बालगंगाधर तिलक पहले भारतीय नेता थे जिन्होंने यह नारा दिया ‘स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है। मैं इसे लेकर रहूंगा।‘ तिलक संस्कृत और गणित के प्रकांड पंडित थे। लोग इन्हें आदर से लोकमान्य’ के नाम से पुकार कर सम्मानित करते थे। इन्हें हिंदू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है। लोकमान्य तिलक ने जनजागृति के लिए महाराष्ट्र में गणेश उत्सव’ तथा ‘शिवाजी उत्सव’ सप्ताह भर मनाना प्रारंभ किया।

इन त्योहारों के माध्यम से जनता में देशप्रेम और ब्रिटिश सरकार के अन्यायों के विरुद्ध संघर्ष का साहस भरा। तिलक अपने क्रांतिकारी विचारों के लिए जाने जाते थे। भारत के ऐसे वीर स्वतंत्रता सेनानी का निधन 1 अगस्त, 1920 को मुंबई में हुआ था।

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200-300 Words Essay, speech on Bal Gangadhar Tilak in English

200-300 Words Essay speech on Bal Gangadhar Tilak

Bal Gangadhar Tilak was a great leader and politician of India. He was born on July 23, 1856, in Chikhali (Chikkan) village in Ratnagiri district of Maharashtra. He was educated at the Deccan College, Poona. He also got the degree of Law but did not put his hand in this business. He dedicated his entire life to the service of the country.

First, He established a school and became a teacher himself. He edited two newspapers named ‘Kesari’ and ‘Maratha Darpan’ in Marathi. Through these newspapers, he created national awareness among the people. He did many things to make the country independent.

The British government understood that they incite people to violent acts, so they were exiled for six years in Mandalay town of Verma state. While in prison, he wrote a commentary on the holy book of Hindus, Shrimad Bhagavad Gita – it was highly praised by the scholars of Karmayoga Rahasya. Reading this, it seems that he had a deep hold on Hindu religious texts.

Bal Gangadhar Tilak was the first Indian leader to give the slogan ‘Swarajya is my birthright. I will take it. Tilak was a great scholar of Sanskrit and mathematics. People respected him by calling him ‘Lokmanya’ with respect. He is also called the father of Hindu nationalism. Lokmanya Tilak started celebrating ‘Ganesh Utsav’ and ‘Shivaji Utsav’ throughout the week in Maharashtra for public awareness.

Through these festivals, people inculcated patriotism and courage to fight against the injustices of the British government. Tilak was known for his revolutionary ideas. Such a brave freedom fighter of India died on August 1, 1920 in Mumbai.


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