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संगम स्नान  200 – 300 शब्दों में  निबंध, भाषण । 200-300 Words Essay, speech on Bath in Sangam in Hindi

संगम स्नान  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण – 200-300 Words Essay, speech on Bath in Sangam in Hindi

संगम स्नान से जुड़े छोटे निबंध जैसे संगम स्नान  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11,और 12 में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  200-300 Words Essay, speech on Bath in Sangam in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

200-300 Words Essay, speech on Bath in Sangam in Hindi 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 & 12

मेरे पापा स्टेट बैंक में असिस्टेंट मैनेजर हैं। एक छोटे से गांव से उनका ट्रांसफर इलाहाबाद हुआ। अब हम अपने पापा के साथ वहां रह सकते थे। परीक्षाएं खत्म हुई तो हम वहां पहुंच गए। मम्मी और भाभी के साथ दादा-द भी थे। हम सब हैरान थे कि वैसे दादा जी अपना गांव छोड़ने के लिए तैयार नहीं। होत, लाकन इस बार एकदम तैयार हो गए थे। बाद में पता चला कि संगम में स्नान करने का आकर्षण उन्हें वहां खींच लाया था।

एक-दो दिन आराम करने के बाद हम संगम में स्नान करने के लिए चल पड़े। हम सारे बच्चे उत्साहित थे नदी में स्नान को लेकर दादा जी ने बताया, “प्रयाग सभी तीर्थों का राजा है। गंगा और यमुना यहां आकर मिलती हैं। सरस्वती का भी इन दोनों नदियों के साथ यहीं मेल होता है, लेकिन वह दिखाई नहीं देती। इसीलिए इसे ‘त्रिवेणी’ भी कहते हैं। “

टैक्सी से हम जहां उतरे वहां से स्नान-स्थल तक जाने के लिए रेत के रास्ते से पैदल जाना पड़ता था। रेत पर दौड़ने का अपना ही मजा था। रेत गर्म थी, लेकिन बालपन के उत्साह और धार्मिक आस्था के सामने उसका कोई अर्थ नहीं रह गया था। दूर से घाट दिखाई दे रहा था।

जब पास पहुंचे, तो सूरज की किरणें गंगा की लहरों पर चमक रही थीं। ..लोग घाट किनारे बैठकर मुंडन करवा रहे थे। ‘हर-हर गंगे’ की आवाज भी कभी-कभी कानों में आ पड़ती थी। यह सब देखकर हमारा तन-मन रोमांचित था। दादा-दादी की आंखों में मुझे अलौकिक तृप्ति दिखाई दे रही थी। ऐसी चमक मैंने कभी उनकी आंखों में नहीं देखी थी।

हमने शीतल और पवित्र जल में स्नान करने के बाद वहां किनारे पर बैठकर आलू-पूरी का आनंद लिया। मुझे पहली बार लगा कि कुछ भी हो तीर्थ स्थानों का अपना महत्त्व है। वहां के वातावरण में कुछ ऐसा है, जो कुछ देर के लिए ही सही शांति का अलौकिक अनुभव कराता है।

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संगम स्नान  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण

200-300 Words Essay, speech on Bath in Sangam in English

My father is an Assistant Manager in the State Bank of India. He was transferred from a small village to Allahabad. Now we could stay there with my father. When the exams were over, we reached there. There were also grandparents with mother and sister-in-law. We were all surprised that Dada ji was not ready to leave his village though. Yes, Lacan was all set this time. It was later learned that the attraction of bathing in the Sangam had drawn him there.

After resting for a day or two, we went to the Sangam to take a bath. We all the children were excited about bathing in the river. Grandfather said, “Prayag is the king of all pilgrimages. Ganga and Yamuna come here and meet. Saraswati also merges with these two rivers here, but she is not visible.” That is why it is also called ‘Triveni’.

From where we got down in the taxi, to reach the bathing place, we had to walk through the sand path. Running on the sand was fun in itself. The sand was hot, but it had no meaning in the face of childhood enthusiasm and religious faith. The pier was visible from afar.

When we reached near, the rays of the sun were shining on the waves of the Ganges. ..people were getting shaved sitting on the side of the ghat. Sometimes the sound of ‘Har Har Gange’ also used to come in the ears. We were thrilled to see all this. I could see supernatural fulfillment in the eyes of the grandparents. I had never seen such a glow in his eyes.

After taking a bath in cold and holy water, we sat on the shore and enjoyed aloo-puri. For the first time, I felt that any number of places of pilgrimage have their own importance. There is something in the atmosphere, which gives a supernatural experience of peace, just for a short while.


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संगम स्नान  200 – 300 शब्दों में  निबंध,भाषण  स्कूल में कक्षा में  पूछे जाते है। इसलिए आज हम  200-300 Words Essay, speech on Bath in Sangam in Hindi के बारे में बात करेंगे ।

नमस्कार , मेरा नाम अंजू वर्मा है | मै उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव से हूँ | मै हिंदी भाषा में पोस्ट ग्रेजुएट हूँ| हिंदी साहित्य में मेरा जुड़ाव बचपन से ही रहा है इसीलिए मैंने परास्नातक के लिये हिंदी को ही एक विषय के रूप में चुना |अंग्रेजी के इस दौर में जहाँ हिंदी एक स्लोगन बनता जा रहा है जबकि जनसँख्या का एक बड़ा हिस्सा हिंदी भाषी है |लेकिन हम अंग्रेजी बोंलने को एक हाई सोसाइटी से जुड़ाव का माध्यम मानने लगे हैं | मुझे कुकिंग, घूमने एवम लिखने का शौक है मै ज्यादातर हिंदी भाषा , मोटिवेशनल कहानी, और फेमस लोगों के बारे में लिखती हूँ |

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