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ये हैं दीपावली मनाने के 10 प्राचीन कारण- जो आपको जानना चाहिये |10 Reasons Why We Celebrate Diwali

ये हैं दीपावली मनाने के 10 प्राचीन कारण- 10 Reasons Why We Celebrate Diwali

दीपावली या दिवाली हिन्दू संप्रदाय के प्रमुख त्योहारों में से एक है I दीपावली ‘दीप’ और ‘अवली’ दो शब्द से मिलकर बना है , जिनका शाब्दिक अर्थ है-दीपों की कतार I सचमुच आज के दिन हमें हर तरफ दीपों की कतार देखने को मिलती है I दीपावली पर्व से कई धार्मिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। जिनमे से हम बस कुछ के बारे में ही जानते हैं , तो आइये इन सभी कथाओं को ध्यान से देखते हैं I

1-यक्ष और गंधर्व जाति का उत्सव

पहली मान्यता हैं कि प्रारंभ में दीवाली के पर्व यक्ष और गंधर्व जाति का उत्सव का दिन था। यह माना जाता है कि दीपावली की रात को यक्ष अपने राजा कुबेर के साथ हास-विलास में बिताते थे और अपनी यक्षिणियों के साथ आमोद-प्रमोद करते थे। बाद में यह त्योहार सभी जातियों का प्रमुख त्योहार बन गया।

2-धन के देवता कुबेर की पूजा

दूसरी मान्यता हैं कि धन के देवता कुबेर के स्थान पर धन की देवी लक्ष्मी की इस अवसर पर पूजा होने लगी, क्योंकि कुबेर जी की मान्यता सिर्फ यक्ष जातियों तक सीमित थी लेकिन लक्ष्मी जी की देव तथा मानव जातियों में भी मान्यता थी। दीपावली के साथ लक्ष्मी पूजन के जुड़ने का कारण लक्ष्मी और विष्णुजी का इसी दिन विवाह सम्पन्न होना भी माना गया है।

दीपावली मनाने के 10 प्राचीन कारण

3-गणेशजी की पूजा का प्रचलन

मान्यता हैं कि लक्ष्मी, कुबेर के साथ बाद में गणेशजी की पूजा का प्रचलन भौव-सम्प्रदाय के लोगों ने किया। ऋद्धि-सिद्धि के दाता के रूप में उन्होंने शिव-पार्वती पुत्र गणेश जी को प्रतिष्ठित किया।

4- समुद्रमंथन से माता काली का प्रकट होना

यह मान्यता हैं कि इस दिन एक ओर जहां समुद्रमंथन के पश्चात धन की देवी लक्ष्मी व औषधि के जनक धन्वंतरि प्रकट हुए थे, वहीं इसी दिन माता काली भी प्रकट हुई थी इसलिए इस दिन काली और लक्ष्मी दोनों की ही पूजा होती है और इसी कारण दीपोत्सव मनाया जाता है।

5-राजा महाबली

मान्यता हैं कि दीपावली के पर्व की शुरुआत पहले राजा महाबली के काल से प्रारंभ हुयी । भगवान् विष्णु के 3 पग में तीनों लोकों को नापने के बाद राजा बली की दानशीलता से प्रभावित होकर उन्हें पाताल लोक का राज्य दे दिया, साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि उनकी याद में समस्त प्रथ्वी वासी प्रत्येक वर्ष दीपावली का उत्सव मनाएंगे। तभी से दीपोत्सव का पर्व प्रारंभ हुआ।

6- इन्द्र की प्रसन्नता

मान्यता हैं कि इसी दिन भगवान विष्णु ने राजा बली की दानशीलता से खुश होकर उन्हें पाताल लोक का स्वामी बनाया था और इन्द्र ने स्वर्ग को सुरक्षित जानकर प्रसन्‍नतापूर्वक दीपोत्सव मनाया था।

7- श्रीराम की अयोध्या वापसी

यह कारण सर्वविदित और सबसे ज्यादा माना जाने वाला है I मान्यता हैं कि भगवान श्रीराम अपना 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद पुन: अयोध्या लौट आए थे। श्रीराम सीधे अयोध्या न जाकर पहले नंदीग्राम गए और वहां कुछ दिन रुकने के बाद दीपावली के दिन उन्होंने अयोध्या में प्रवेश किया था। इस दौरान उनके लिए खासतौर पर नगर को दीपों से सजाया गया था। तभी से दिवाली के दिन दीपोत्सव मनाने का प्रचलन हुआ।

8- नरकासुर का वध

नरकासुर वध (Source)

मान्यता हैं कि दीपावली के एक दिन पहले श्रीकृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध किया जिसे हम नरक चतुर्दशी के रूप में मनाते है। इसी खुशी में अगले दिन अमावस्या को गोकुल वासियों ने दीपक जलाकर खुशियां मनाई। दूसरी घटना श्रीकृष्ण द्वारा सत्यभामा के लिए पारिजात वृक्ष लाने से जुड़ी है। श्री कृष्ण ने इंद्र पूजा का विरोध करके गोवर्धन पूजा के रूप में अन्नकूट की परंपरा प्रारंभ की थी।

9- महाकाली द्वारा असुरों का संहार

महाकाली

मान्यता हैं कि असुरों का वध करने के लिए देवी माँ ने महाकाली का रूप धारण किया। राक्षसों का वध के पश्चात् भी जब महाकाली का क्रोध कम नहीं हुआ तब भगवान शिव उनके चरणों में लेट गए। भगवान शिव के शरीर स्पर्श होते ही देवी महाकाली का क्रोध शांत हो गया। इसी की याद में महाकाली के शांत रूप लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत हुई। इसी रात इनके रौद्ररूप काली की पूजा का भी विधान है।

10- सिन्धु घाटी सभ्यता से मिले साक्ष्य

मोहनजोदड़ो सभ्यता के प्राप्त अवशेषों में मिट्टी की एक मूर्ति के अनुसार उस समय भी दीपावली मनाई जाती थी। उस मूर्ति में मातृ-देवी के दोनों ओर दीप जलते हुये दिखाई देते हैं। इससे यह स्वत: ही सिद्ध हो जाता है कि यह सभ्यता हिन्दू सभ्यता थी जो दीपावली का पर्व मनाती थी।

मै आशा करती हूँ कि  दीपावली पर लिखा लेख ( ये हैं दीपावली मनाने के 9 प्राचीन कारण- जो आपको जानना चाहिये ) आपको पसंद आया होगा I साथ ही साथ आप यह लेख अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ जरूर साझा (Share) करेंगें I और हमें यह भी बताइए कि इनमे से कौन-कौन से तथ्य आपको पहले से ही मालूम थे I धन्यवाद

FAQ-

दिवाली कब है २०२२ ?

दिवाली 24 अक्टूबर 2022 को है I

दीपावली का प्राचीन नाम क्या है?

दीपावली का प्राचीन नाम दीपोत्सव है I

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दीपावली पर 600 शब्दों में निबंध, भाषण

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नमस्कार , मेरा नाम अंजू वर्मा है | मै उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव से हूँ | मै हिंदी भाषा में पोस्ट ग्रेजुएट हूँ| हिंदी साहित्य में मेरा जुड़ाव बचपन से ही रहा है इसीलिए मैंने परास्नातक के लिये हिंदी को ही एक विषय के रूप में चुना |अंग्रेजी के इस दौर में जहाँ हिंदी एक स्लोगन बनता जा रहा है जबकि जनसँख्या का एक बड़ा हिस्सा हिंदी भाषी है |लेकिन हम अंग्रेजी बोंलने को एक हाई सोसाइटी से जुड़ाव का माध्यम मानने लगे हैं | मुझे कुकिंग, घूमने एवम लिखने का शौक है मै ज्यादातर हिंदी भाषा , मोटिवेशनल कहानी, और फेमस लोगों के बारे में लिखती हूँ |

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